छलावा साबित हुआ पुस्तक मेला, फिर शुरु हुई लूट

सतना :निजी शिक्षण संस्थानों, निजी प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं के गठजोड़ के चलते अभिभावकों के साथ होने वाली लूट से बचाने के उद्देश्य से शहर में 3 दिवसीय पुस्तक मेला आयोजित किया गया था. मामले का सराहनीय पहलू यह भी रहा कि मेले में केवल पाठ्य पुस्तक निगम/एनसीईआरटी की पुस्तकें ही बेची गईं. लेकिन कुछ दिनों बाद ही वही पुरानी व्यवस्था लौट आई और पिछले दरवाजे से निजी प्रकाशकों की मंहगी पुस्तकें बेचे जाने का खेल शुरु हो गया.

नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के आरंभ के साथ ही शासकीय व्यंकट क्र. 2 उमा विद्यालय परिसर में 3 दिवसीय पुस्तक मेला लगाया गया था. 13, 14 और 15 अप्रैल तक आयोजित इस पुस्तक मेले को कितनी सफलता मिली यह भले ही विमर्श का विषय हो सकता है. लेकिन सराहनीय पहलू यह सामने आया कि पुस्तक मेले में सम्मिलित होने वाले विक्रेताओं द्वारा उस दौरान अभिभावकों को केवल पाठ्य पुस्तक निगम/एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें ही बेची गईं.

हलांकि बदले परिदृश्य को देखते हुए कुछ अभिावकों को शंका हुई. लिहाजा उन्होंने पुस्तक विक्रेताओं से बार-बार यह पूछ कर सुनिश्चत करने का प्रयास किया कि क्या इस बार किसी निजी प्रकाशक की पुस्तकें नहीं खरीदनी पड़ेंगी. जिस पुस्तक विक्रेताओं ने आश्वस्त किया कि और किसी तरह की किताबे उपलब्ध ही नहीं हैं. लेकिन इसके बावजूद भी कुछ अभिभावकों की जिग्यासा कम नहीं हुई.

लिहाजा उन्होंने उन पुस्तक विक्रेताओं से जानकारी ली, जिनकी दुकानों से वे अब तक पुस्तक खरीदने को बाध्य रहे थे. उस दौरान उन पुस्तक विक्रेताओं ने भी यही बताया कि केवल पाठ्य पुस्तक निगम/एनसीईआरटी की पुस्तकें ही उपलब्ध हैं. वहीं कुछ दिनों बाद ही भीषण गर्मी का दौर शुरु हो गया. जिसके चलते प्रशासन द्वारा शिक्षण कार्य स्थगित किए जाने का निर्णय लिया जाने लगा.

लेकिन जैसे ही ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरु होने के हुए वैसे ही अधिकांश निजी विद्यालयों का प्रबंधन सक्रिय हो गया. आनन-फानन में अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की लंबी चौड़ी सूची थमा दी गई. नतीजतन अभिभावकों को एक बार फिर विद्यालयों से अघोषित तौर पर संबद्ध उन्हीं दुकानों का रुख करना पड़ा जहां पर उन्हें पिछले कई वर्षों से लूटा जा रहा था. अभिभावकों के अनुसार जितने रुपयों में उन्होंने पुस्तक मेले से पाठ्य पुस्तक निगम/एनसीईआरटी की पुस्तकें खरीदी थीं, उससे दस गुना से अधिक कीमत उन्हें निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने में चुकानी पड़ी.
कक्षा 1 से 12वीं तक यही हाल
पुस्तक मेले में जहां पाठ्य पुस्तक निगम/एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसी आधारभूत विषयों की पुस्तकें ही बेची गईं. वहीं दूसरी ओर निजी विद्यालयों द्वारा कंप्यूटर, मॉरल साइंस, इनवायरमेंट और जनरल नॉलेज सहित दर्जन भर से अधिक पुस्तकें की सूची अभिभावकों को थम दी गई. जिनकी औसत कीमत कम से कम 300 रु प्रति पुस्तक बताई गई. एक ओर जहां छोटी कक्षाओं के लिए तमाम निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बेची जाने लगी हैं. वहीं दूसरी ओर कक्षा 9वीें से लेकर 12वीं तक के लिए सभी विषयों के लिए कम से कम 2 सहायक पुस्तकों को खरीदने का फरमान जारी हो गया. जिनकी औसत कीमत 400-500 रु आंकी गई. नतीजतन यदि किसी अभिभावक ने मेले से 500 रु की पुस्तकें खरीदी होंंगी, तो अब उन्हें उससे 10 गुना से अधिक कीमत की निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने को बाध्य होना पड़ रहा है.
इनका कहना है
सभी विद्यालयों को पुस्तकों से संबंधित सूचना को पोर्टल में अपलोड करना होता है. जिसे अभिभावक द्वारा स्वयं भी देखा जा सकता है. यदि पोर्टल में अपलोड सूचना में किसी तरह की विसंगति नजर आती है तो उसे संज्ञान में लाया जाए अथवा कोई प्रमाणिक शिकायत सामने आए तो संबंधित विद्यालय और पुस्तक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.
गिरीश अग्रिहोत्री, जिला शिक्षा अधिकारी, सतना

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