कोलकाता, 28 अगस्त (वार्ता) कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने गुरुवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक युवा डॉक्टर के साथ बलात्कार एवं हत्या मामले में आगे की जांच की मांग करने वाली एक नयी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने कहा कि चूंकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और मामले में एकमात्र दोषी संजय रॉय दोनों ने पहले के आदेशों को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है इसलिए नयी याचिका की सुनवाई एकल पीठ के बजाय खंडपीठ में होनी चाहिए।
न्यायमूर्ति घोष ने बुधवार को पीड़ित परिवार के वकील फिरोज एडुल्जी से कहा था कि वे इस मामले पर परिवार के साथ चर्चा करें और उनकी प्राथमिकता बताएं।
जब गुरूवार को इस मामले की सुनवाई हुई तो वकील ने कहा कि अगर मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति देबांग्शु बसाक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ द्वारा होती है तो परिवार को कोई आपत्ति नहीं है जो पहले से ही संबंधित अपीलों की जांच कर रही है। इसके बाद न्यायमूर्ति घोष ने मामले से खुद को अलग कर लिया और आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के दस्तावेजों को आवश्यक निर्धारण के लिए मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम के पास भेजा जाए।
पिछले साल दिसंबर में पीड़िता के परिवार द्वारा दायर की गई याचिका में सीबीआई की जांच में खामियों का आरोप लगाया गया और नए सिरे से जांच की मांग की गई।
आरजी कर अस्पताल की भयावह घटना पिछले वर्ष नौ अगस्त को हुई थी जब एक पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार हॉल में पाया गया था। इस क्रूर अपराध से पूरे देश में आक्रोश फैल गया था और डॉक्टरों, नागरिकों और महिला समूहों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था।
इसके लिए नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को दोषी ठहराया गया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सजा के खिलाफ उसकी अपील और सीबीआई की संबंधित याचिका फिलहाल न्यायमूर्ति देबांग्शु बसाक की खंडपीठ के समक्ष लंबित है।
