इंदौर: मध्यप्रदेश के दूरस्थ वनवासी अंचलों में अब अंधकार नहीं, बल्कि विकास की रोशनी फैल रही है. मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा चलाए जा रहे रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत हजारों आदिवासी परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है.
कंपनी के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह के निर्देशन में धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर जैसे जिलों के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया गया. इस अभियान के अंतर्गत अब तक 11,350 वनवासी परिवारों को स्थायी बिजली कनेक्शन से जोड़ा गया है. ये वे परिवार थे जो मुख्य गांवों से 1 से 3 किलोमीटर दूर छोटे-छोटे मजरे, फलिए और टोलों में बसे हुए थे.
अब तक ये लोग अस्थायी और अव्यवस्थित बिजली व्यवस्था पर निर्भर थे, लेकिन अब उन्हें स्थायी लाइन, मीटर और पर्याप्त वोल्टेज के साथ 24 घंटे बिजली मिल रही है. इससे उनके दैनिक जीवन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. अभियान के दौरान कई जगहों पर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. सेंधवा क्षेत्र में 500 मीटर ऊंची पहाड़ियों पर बसे घरों तक भी बिजली पहुंचाई गई, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.
सुधार की नींव रखी
इस पहल ने न केवल आदिवासी अंचलों में रोशनी पहुंचाई है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और छोटे व्यवसायों को भी नई ऊर्जा दी है, जिससे वनवासी समुदाय के जीवन स्तर में सुधार की मजबूत नींव रखी गई है.
