सीहोर। जिले की इछावर तहसील के 11 गांवों के किसानों ने नर्मदा पार्वती लिंक परियोजना से वंचित किए जाने का आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध दर्ज कराया. किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे.
सरकार की महत्वाकांक्षी नर्मदा पार्वती लिंक परियोजना का कार्य जिले में चार चरणों में प्रगति पर है, लेकिन इछावर तहसील के कई गांवों के किसानों का आरोप है कि उन्हें इस योजना के लाभ से जानबूझकर वंचित किया जा रहा है. मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. किसानों के अनुसार, ग्राम दुदलाई, दौलतपुर, रघुनाथपुरा, रूपडदी, रूपदाह, गाडिय़ा गोड़ी, खुर्द बावडिय़ा, गोसाई, लाल्याखेड़ी, कुंडीकाल और हरासपुर सहित कुल 11 गांवों को योजना से बाहर कर दिया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले चार वर्षों से लगातार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं मिला है.
किसानों ने बताया कि ये सभी गांव असिंचित क्षेत्र में आते हैं, जहां आजीविका का मुख्य आधार खेती और पशुपालन है. उन्होंने कहा कि नर्मदा पार्वती लिंक परियोजना की लाइन का प्रवेश इन्हीं गांवों से हुआ था और वर्ष 2018 में आष्टा में भूमि पूजन के समय जारी नक्शों में इन गांवों को फेस-1 और फेस-2 में शामिल किया गया था. लेकिन बाद में संशोधित योजनाओं में इन्हें बाहर कर दिया गया.
कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे सभी 11 गांवों के ग्रामीणों के साथ धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे. उन्होंने मांग की है कि सभी वंचित गांवों को पुन: नर्मदा पार्वती लिंक परियोजना में शामिल किया जाए और उन्हें सिंचाई का लाभ दिया जाए. ज्ञापन सौंपने के दौरान सुआलाल जाट, कैलाश प्रसाद, योगेश जाट, विष्णु बना, गणेश, कचरू बामनिया, देवीलाल जाट, लक्ष्मी नारायण वर्मा, प्रेमनारायण बागवान, कमलेश शर्मा, प्रेम जाट, देवराज मालवीय, कुलदीप, कपिल पटेल, महेश जाट, आशीष पटेल, दिनेश, देवीशंकर जाट और अमृतलाल उपस्थित रहे. किसानों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है.
किसानों का कहना, प्रशासन बार-बार कर रहा भ्रमित
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा बार-बार उन्हें भ्रमित किया गया. पहले कहा गया कि इन गांवों को फेस-3 और फेस-4 में जोड़ा जाएगा, जबकि ये क्षेत्र फेस-1 और फेस-2 की कमांड में आते हैं. इसके बाद कोलार परियोजना से पानी देने का आश्वासन भी दिया गया, जो अब तक पूरा नहीं हुआ. किसानों ने यह भी बताया कि नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-25, नर्मदानगर (जिला खंडवा) द्वारा 13 जनवरी 23 को एक प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा गया था, जिसकी प्रति किसानों को भी दी गई थी। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. संकल्प से समाधान शिविर में भी किसानों ने अपनी मांग रखी थी, लेकिन वहां भी समाधान नहीं निकला, जिससे वह काफी निराश व आक्रोशित हैं.
