सलकनपुर। क्षेत्र में बैंकिंग व्यवस्था और बीमा प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. रेहटी निवासी पान व्यवसायी राधेश्याम पंसारी की पत्नी छाया बाई पंसारी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो चुका था, लेकिन आरोप है कि निधन के महीनों बाद उनके नाम पर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत बीमा सक्रिय कर दिया गया और खाते से प्रीमियम की पहली किस्त राशि भी काट ली गई. मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर बैंकिंग प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
पीडि़त परिवार के अनुसार, पत्नी का निधन 29 जनवरी 25 को हुआ था. निधन के करीब 7 महीने बाद 20 सितंबर 25 को जब बैंक खाते से प्रीमियम कटने का मोबाइल में संदेश मिला, तब उन्हें इसकी जानकारी हुई. इसके बाद परिवार ने बैंक शाखा से संपर्क किया और आपत्ति दर्ज कराई. मामला अब कानूनी कार्रवाई की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है.
राधेश्याम पंसारी ने भावुक होते हुए कहा, मेरी पत्नी अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनके निधन के बाद उनके नाम पर बीमा होना और खाते से प्रीमियम कटना मेरे परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक है. यह सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं और सम्मान के साथ भद्दा मजाक है. टार्गेट के चलते किसी का भी उठा कर बीमा कर देते है. जिसका खामियादा बैंक के हुक्मरानों को भोगना पड़ेगा. यदि मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊंगा.
मामले में बैंक ऑफ इंडिया की रेहटी शाखा के बैंक मेनेजर शैलेश शुक्ला का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी आंतरिक जांच कराई जा रही है, वहीं हमारे द्वारा बीमा क्लेम रजिस्टर्ड कर दिया गया है. यदि दस्तावेज सत्यापन या प्रक्रिया में किसी स्तर पर त्रुटि हुई है, तो उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी.
बीमा और बैंकिंग मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जीवन बीमा योजना में ग्राहक की पात्रता, जीवित स्थिति और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है. किसी भी बीमा की शुरुआत से पहले आवेदक के हस्ताक्षर एवं उसकी अनुमति जरूरी है विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसी मृत व्यक्ति के नाम पर बीमा सक्रिय हुआ है, तो यह गंभीर प्रक्रियात्मक चूक मानी जा सकती है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है.
