वॉशिंगटन, 04 मई (वार्ता) अमेरिका का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ एक बड़ा सैन्य स्तरीय अभियान है जिसमें गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स, 100 से अधिक विमान और लगभग 15,000 सैन्य कर्मी तैनात किये गये हैं। यह उन देशों की तत्परता को दर्शाता है, जो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने का समर्थन कर रहे हैं। अपनी व्यापकता और मारक क्षमता के बावजूद इस अभियान से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक में बढ़ती अस्थिरता का कोई स्थायी समाधान मिलने की संभावना कम ही है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस मिशन का उद्देश्य केवल वाणिज्यिक जहाजों को मात्र सुरक्षा देना नहीं बल्कि इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने का व्यापक प्रयास है। इस मार्ग से प्रतिदिन वैश्विक समुद्री तेल का लगभग एक-चौथाई हिस्सा और भारी मात्रा में एलएनजी, ईंधन व उर्वरक लदे जहाज गुजरते हैं। सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा है कि उसकी सेनाएं चार मई से इस पहल का समर्थन करना शुरू कर देंगी, ताकि जलडमरूमध्य के माध्यम से वैश्विक जहाजरानी के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित किया जा सके। यह जलमार्ग दुनिया के समुद्री तेल व्यापार के लगभग एक-चौथाई हिस्से के साथ-साथ एलएनजी, ईंधन और उर्वरकों की भारी मात्रा की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होता है।
इस अभियान में ‘अर्ले बर्क’ श्रेणी के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स तैनात किये जायेंगे, जिन्हें अमेरिकी नौसेना की रीढ़ माना जाता है। इनके साथ ही जमीन और समुद्र आधारित विमान, मल्टी-डोमेन मानवरहित प्लेटफॉर्म और हजारों सैन्य कर्मी तैनात होंगे। सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, “इस रक्षात्मक मिशन के लिए हमारा समर्थन क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है, क्योंकि हम नौसैनिक घेराबंदी को भी बनाये रख रहे हैं।” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर यह योजना उन जहाजों की मदद के लिए शुरू की जा रही है, जो जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं। साथ ही, चेतावनी दी गयी है कि किसी भी तरह के हस्तक्षेप का जवाब सैन्य बल से दिया जायेगा।
इस बात की संभावना कम है कि ये डिस्ट्रॉयर्स सीधे तौर पर व्यापारिक काफिलों को जलडमरूमध्य के पार ले जायेंगे। इसके बजाय हवाई रक्षा, निगरानी और समुद्री सुरंगों को हटाने के प्रयासों में उनके सहयोग करने की उम्मीद है। क्षेत्र में मौजूद कुछ अमेरिकी युद्धपोत पहले से ही अरब सागर से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी करने में जुटे हुए हैं। इस अभियान में वायु शक्ति की केंद्रीय भूमिका होगी। इसमें छोटे दुश्मन जहाजों या तटीय मिसाइल प्रणालियों जैसे खतरों का मुकाबला करने के लिए सशस्त्र हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमान तैनात किये गये हैं। इसके अलावा, टोही और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं के लिए हवाई और समुद्री ड्रोन सहित मानवरहित प्लेटफॉर्मों के उपयोग की भी उम्मीद है।
यह तैनाती हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उस गंभीर व्यवधान के बीच हुई है, जो 28 फरवरी को ईरान संघर्ष के बढ़ने के बाद से शुरू हुआ था। ईरानी प्रतिबंधों और अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाइयों ने मिलकर वाणिज्यिक यातायात को प्रभावी ढंग से रोक दिया है।
इससे सैकड़ों तेल टैंकर और एलएनजी वाहक फंसे हुए हैं। ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को एक अस्थायी उपाय के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य गैर-ईरानी वाणिज्यिक जहाजों की सीमित आवाजाही की अनुमति देकर भीड़भाड़ को कम करना और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करना है। इस पहल को मूल संघर्ष के स्थायी समाधान की बजाय अल्पकालिक जोखिम-प्रबंधन प्रयास के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। गौरतलब है कि यह संघर्ष वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अब भी बड़ा खतरा बना है।

