नयी दिल्ली, 03 मई (वार्ता) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि उसके 2014 में सत्ता में आने के बाद से देश की विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में स्थिति बिगड़ी है और भारत दुनिया में प्रेस की आजादी को लेकर 157वें स्थान पर पहुंच गया है जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
श्री खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर रविवार को एक पोस्ट में कहा कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को एक कठोर और अकाट्य वास्तविकता का सामना करना होगा। प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में 2014 से भारत की स्थिति लगातार गिर रही है और आज यह विश्व में गिरकर 157वें स्थान पर है।
उन्होंने लिखा कि सच्ची स्वतंत्र प्रेस का अस्तित्व सरकार की कहानी को बढ़ावा देने या उसकी असफलताओं को छिपाने के लिए नहीं है। प्रेस का काम सत्ता के कामकाज की जांच करना, सवाल पूछना और सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह बनाना है। लोकतंत्र में मीडिया शक्ति और जनता के बीच संतुलन बनाए रखती है। पत्रकार जनता के सत्य के संरक्षक हैं।
श्री खरगे ने इस सम्बंध में पंडित जवाहरलाल नेहरू का उद्धरण देते हुए कहा, “प्रेस की स्वतंत्रता केवल एक नारा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य अंग है।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान शासन में यह अनिवार्य अंग गंभीर रूप से प्रभावित हो गया है।
उन्होंने संघ परिवार पर हमला किया और कहा कि उसने कानूनी ढांचे को हथियार बनाकर समाचार कक्षों को चुप कराने की कोशिश की है। मानहानि, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य सख्त कानूनों का इस्तेमाल न्याय के बजाय डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने आंकड़े देते हुए बताया कि 2014 से 2020 के बीच 135 से अधिक पत्रकारों को गिरफ्तार, हिरासत या पूछताछ में लिया गया। वर्ष 2014 से 2023 तक 36 पत्रकार जेल भेजे गए। कई पर यूएपीए जैसे कड़े कानून लगाए गए।
उन्होंने पत्रकारों की हत्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा शासित राज्यों में पत्रकारों की हत्याएं हो रही हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के राघवेंद्र बाजपेयी, छत्तीसगढ़ के मुकेश चंद्राकर, उत्तराखंड के राजीव प्रताप सिंह और हरियाणा के धर्मेंद्र सिंह चौहान का नाम लिया, जो भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग कर रहे थे।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अब सोशल मीडिया पर भी कड़ी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र पत्रकारिता को सजा मिलेगी और आज्ञाकारिता को इनाम ,भाजपा-आरएसएस का यही संदेश है। उन्होंने सभी से इस मुद्दे पर गहन आत्मचिंतन की अपील की और सत्ता में बैठे लोगों से लोकतांत्रिक मूल्यों, संस्थाओं और जनता की सेवा की रक्षा करने का आग्रह किया।
