ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर पाकिस्तान को भेजा एक नया प्रस्ताव

तेहरान, 01 मई (वार्ता) ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान को एक नया प्रस्ताव भेजा है।

ईरान की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने और युद्ध को खत्म करने के प्रयास जारी हैं। ईरान के अधिकारियों ने बताया कि यह दस्तावेज़ गुरुवार शाम को पाकिस्तानी मध्यस्थों को सौंपा गया। ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान अभी भी ईरान और अमेरिका के बीच मुख्य माध्यम के रूप में काम कर रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि ईरान का मुख्य ध्यान संघर्ष को समाप्त करने और “स्थायी शांति” सुनिश्चित करने पर बना हुआ है। सरकारी टेलीविज़न पर बोलते हुए, उन्होंने दोहराया कि कूटनीति का विकल्प अभी भी खुला है, लेकिन केवल उन्हीं शर्तों पर जो ईरान को स्वीकार्य हों।

यह ताज़ा कदम 11 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद उठाया गया है। उस बातचीत में भी पाकिस्तान ने मध्यस्थता की थी, लेकिन वह वार्ता असफल रही क्योंकि दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया था। तब से, दोनों पक्ष अप्रत्यक्ष रूप से एक-दूसरे को संदेश भेज रहे हैं, लेकिन प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनने के बहुत कम संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि वे अभी भी ‘शीत युद्ध’ जैसी स्थिति में उलझे हुए हैं।

ईरानी अधिकारियों ने बार-बार अमेरिका के इरादों पर सवाल उठाए हैं, और पिछले डेढ़ साल में हुई बातचीत का ज़िक्र किया है। उन्होंने बताया कि उन सभी बातचीत के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई भी चल रही थी। इसके अलावा, अमेरिका पर बहुत ज़्यादा माँगें रखने और ईरान पर समझौता करने का दबाव डालने का आरोप लगाते हुए, ईरान ने इस रवैये को इस बात का पक्का सबूत बताया है कि बातचीत में अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

ईरान के मुख्य न्यायाधीश गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई ने भी इसी तरह की बात कहते हुए कहा कि इस्लामिक गणराज्य बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन किसी भी तरह का दबाव स्वीकार नहीं करेगा। न्यायपालिका के ‘मीज़ान ऑनलाइन’ पोर्टल पर छपे अपने बयान में उन्होंने कहा, “इस्लामिक गणराज्य बातचीत से कभी पीछे नहीं हटा है। ”

उन्होंने कहा कि ईरान “किसी भी तरह की ज़बरदस्ती या थोपी गई शर्तों को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान नहीं चाहता कि युद्ध जारी रहे, लेकिन उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया कि इसकी कुछ सीमाएँ होंगी। उन्होंने कहा, “हम किसी भी तरह से युद्ध का स्वागत नहीं करते… लेकिन हम अपने सिद्धांतों और मूल्यों को छोड़ने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं।”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस संघर्ष के दौरान अमेरिका को “कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में होने वाली किसी भी बातचीत में ईरान “पीछे नहीं हटेगा।” फ़िलहाल, यह प्रस्ताव पाकिस्तानी मध्यस्थों के पास है, और अमेरिका की ओर से अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि वह इस नए प्रस्ताव पर बातचीत के लिए आगे आएगा या नहीं।

 

 

Next Post

चयन प्रकिया निरस्त तो फिर उसे चुनौती देने का कोई औचित्य नहीं: हाईकोर्ट

Fri May 1 , 2026
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने कहा कि जब दूषित होने के कारण पूरी चयन प्रक्रिया ही निरस्त हो गई और कोई भी उम्मीदवार प्रभावित नहीं हुआ, तो उसे चुनौती देने का कोई औचित्य नहीं है। इस मत के साथ जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने उम्मीदवारों की उस याचिका को खारिज […]

You May Like