जल स्वावलंबी योजना: जल संकट वाले गांवों की दूर होगी समस्या

सीधी। गर्मी में जल संकट को दूर करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से जल संरक्षण रणनीति तैयार की गई है। इसके लिए 3.40 करोड़ खर्च किए जाएंगे। गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से जूझने वाले गांवों में जल स्वावलंबी योजना के तहत भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए जल संरक्षण संबंधित कार्य किए जाएंगे।

जिले के प्रत्येक विकासखंड से ऐसे एक-एक गांवों का चयन किया गया है। जहां गर्मी के मौसम में ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ता है। इन गांवों का भूजल स्तर गर्मी के मौसम में जिले के सामान्य जल स्तर से काफी नीचे चला जाता है। ऐसी स्थिति में जल स्त्रोत सूख जाते हैं और पानी की किल्लत शुरू हो जाती है। ऐसे गांवों में सीधी विकासखंड के ग्राम पंचायत कमर्जी अंतर्गत बीछी पतेर गांव, रामपुर नैकिन विकासखंड के ग्राम पंचायत रतवार, मझौली विकासखंड के ग्राम पंचायत निधिपुरी अंतर्गत धुंआडोल, कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नवानगर के अमगांव तथा सिहावल विकासखंड के ग्राम पंचायत हर्दी अंतर्गत बघौड़ी गांव शामिल है। चयनित गांवों का जल स्तर गर्मी के मौसम में नीचे चले जाने के कारण पेयजल की समस्या उत्पन्न हो जाती है। कुएं और हैण्डपंप सूख जाते हैं। जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार जल स्वावलंबी ग्राम योजना के तहत चयनित ग्रामों में भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए वर्षा के जल को ग्राम में ही संरक्षित करने के लिए कार्य किया जाएगा। इसके लिए 3.40 करोड़ खर्च किए जाने की तैयारी है। इन गांवों में जल जीवन मिशन के तहत भी पेयजल पहुुंचाने की कवायत चल रही है लेकिन योजना का कार्य अभी प्रगतिरत है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन गांवों में वर्ष 2028 के मार्च माह तक योजना के तहत पेयजल पहुंचाने की बात कही जा रही है। जल स्वावलंबी योजना के तहत ग्रामों का चयन किए जाने के बाद जिला पंचायत के माध्यम से ग्रामों का सतही सर्वे कराया गया, जिसके बाद वर्षा का जल गांव में संरक्षित करने के लिए डीपीआर तैयार कराया गया है। डीपीआर तैयार होने के बाद संबंधित गांवों में जल संरक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा।

हैण्डपंप उगलने लगे हवा

गर्मी के सवाब में आते ही संबंधित गांवों में जल स्तर नीचे खिसकने से हैण्डपंप पानी की जगह हवा उगलने लगे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार बीछी पतेर में तीन हैण्डपंप हैं। जिनमें सिंगल फेस मोटरपंप डाला गया है। लेकिन इनमें पानी आना कम हो गया है। गर्मी के मौसम में ये पूरी तरह से सूख जाते हैं। रतवार गांव में कुल 32 हैण्डपंप हैं। जिसमें से वर्तमान में 27 चालू और 5 जलस्तर कम होने से बंद हैं। धुुंआडोल में 10 हैण्डपंप हैं जिसमें 7 चालू हैं और 3 जल स्तर कम होने से बंद हैं। अमगांव में 19 हैण्डपंप हैं। जिसमें 14 चालू हैं और 5 जल स्तर कम होने से बंद हैं। वहीं बघौड़ी में 14 हैण्डपंप हैं जिसमें से 9 चालू और 5 जल स्तर कम होने से बंद हैं। रिपोर्ट के अनुसार गर्मी जब चरम पर आती है तो जल स्तर काफी नीचे खिसक जाता है। जिससे ज्यादातर हैण्डपंप और जल स्त्रोत सूख जाते हैं।

इन गांवों के लिये तैयार किया गया डीपीआर

विकासखंड गांव डीपीआर राशि

सीधी बीछी पतेर 83.50 लाख

रामपुर नैकिन रतवार 79.58 लाख

मझौली धुंआडोल 84.20 लाख

कुसमी अमगांव 50.77 लाख

सिहावल बघौड़ी 42.16 लाख

कुल 340.21 लाख

इनका कहना है

जिला पंचायत की ओर से इस बार पेयजल संकट वाले ग्रामों का चयन किया गया है। प्रत्येक विकासखंड से एक-एक गांव जल स्वावलंबी के तहत चयनित किए गए हैं। वर्षा के जल को गांव में ही संरक्षित करने के लिए डीपीआर तैयार किया गया है। ताकि गांव का जल स्तर बढ़ाकर जल संकट को दूर किया जा सके।

त्रयंबकेश द्विवेदी, कार्यपालन यंत्री पीएचई सीधी

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