सतना : जिले के चित्रकूट क्षेत्र अंतर्गत मझगवां ब्लॉक के तराई क्षेत्र में गंभीर कुपोषण के चलते हाल ही में 2 बच्चों की मौत हो जाने और 2 बच्चों के गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज रीवा में उपचाररत होने के मामले को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्य स्तरीय टीम ने बुधवार को न सिर्फ क्षेत्र का भ्रमण करते हुए प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, बल्कि स्थानीय स्तर के फील्ड स्टॉफ से चर्चां कर जमीनी हकीकत को समझने का प्रयाया किया. यह बात और कि स्थानीय आम जन की आकांक्षाओं पर स्वास्थ्य मिशन की टीम का यह दौरा खरा नहीं उतरा.राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्य स्तरीय टीम बुधवार को भोपाल से सतना पहुंची और चित्रकूट के लिए रवाना हो गई.
चित्रकूट के मझगवां ब्लॉक पहुंचने पर यह टीम 2 हिस्सों ममें बंट गई. जिसमें से एक टीम ने उप निदेशक स्वास्थ्य भोपाल राजेश भौरे के नेतृत्व में पथरा पालदेव का रुख किया. वहीं दूसरी टीम उप निदेशक बाल्य स्वास्थ्य भोपाल हिमाली यादव के नेतृत्व में मतहैन की ओर निकल गई. स्वास्थ्य मिशन की दोनों टीम ने अपने अपने क्षेत्र में भ्रमण करते हुए कुपोषण प्रभावित बच्चों के परिजनों से भेंट की. इस दौरान ग्रामीणों को संस्थागत प्रसव सहित जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की नसीहत भी दी गई. इसके साथ ही फील्ड में पदस्थ रहने वाले स्टॉफ आंगनबाड़ी और ऊषा-आशा कार्यकत्र्ताओं की सहायता लेने के लिए भी कहा गया.
इसके अलावा ग्रामीणों से यह भी कहा गया कि स्वास्थ्य गड़बड़ होने पर किसी झोलाछाप चिकित्सक से दवा कराने के बजाए सीधे स्वास्थ्य केंद्र जाएं. इसी कड़ी में टीम कैमहा गांव में पहुंची. जहां के एक आदिवासी परिवार की 11 माह की बच्ची की कुछ दिनों पहले ही मौत हो गई थी. इसी कड़ी में टीम ने सुरंगी पहुंंचकर कपोषण से मृत बच्ची प्रियांशी के परिजनों से भी मुलाकात की. कुपोषण प्रभावित बच्चों के परिजनों से भेंट करने के साथ ही स्वास्थ्य मिशन की टीम ने फील्ड स्टॉफ को भी तलब किया. जिनसे बारी-बारी से चर्चा करते हुए कार्य की सजगता को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए.
सुविधाविहीन है आंगनबाड़ी
पाथरा पालदेव निवासी द्वारिका प्रसाद आरख ने जब स्वास्थ्य मिशन की टीम को क्षेत्र में भ्रमण करते हुए देखा तो बेहतर व्यवस्थाओं की उम्मीद में आधारभूत समस्यायों को उनके सामने रखने में जरा भी देर नहीं लगाई. द्वारिका ने उप निदेशक को जानकारी देते हुए बताया कि पथरा और सुरंगी दोनों ही गांव में जो आंगनबाड़ी केंद्र में पेयजल और शौचालय जैसी आधारभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं है. कार्यकत्र्ता अपने स्तर पर टंकी में पानी भरती हैं, जो बच्चों को पिलाया जाता है. वहीं शौच के लिए बच्चों को दूर ले जाना पड़ता है. यह समस्या को जिम्मेदारों के समक्ष कई बार उठाया गया. लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो सका.
घरों में होता है प्रसव
द्वारिका ने स्वास्थ्य टीम को जानकारी देते हुए आगे बताया गया संस्थागत प्रसव का मामला यहां पर केवल कागजों में ही नजर आता है. वास्तविकता यह है कि काफी संख्या में प्रसव घरों में ही जो जाते हैं. इतना ही नहीं बल्कि घर में प्रसव के चलते कई लोगों की मौत तक हो जाती है. इस गंभीर समस्या के बावजूद भी यहां पर प्रसव के लिए एक हास्पिटल तक नहीं खोला गया है. आलम यह है कि यहां पर कोई एंबुलेंस कभी समय पर नहीं पहुंच पाती है. स्वास्थ्य टीम ने क्षेत्र की आधारभूत समस्यायों को गौर से सुना तो जरुर लेकिन जब ग्रामीणों ने व्यवस्था में सुधार की अपेक्षा करनी शुरु की तो टीम ने गेंद को क्षेत्र के एसडीएम के पाले में डालते हुए किनारा कर लिया.
