
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ को सरकार की ओर से बताया गया कि विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्यवाही किये जाने संबंधित आवेदन की सुनवाई विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 22 अप्रैल को की गई थी। विधायक निर्मला सप्रे के आवेदन पर विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें दस्तावेज पेश करने समय प्रदान किया है। सरकार के जवाब को रिकॉर्ड में लेते हुए युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की है।
उल्लेखनीय है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से हाईकोर्ट में दल-बदल कानून के तहत कांग्रेस की बीना से विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन शून्य करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया था कि उन्होंने 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष तोमर के समक्ष इस मामले में याचिका दायर की थी। लेकिन निर्धारित 90 दिन के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई। जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई है। याचिका में कहा गया था कि विधायक निर्मला सप्रे ने पार्टी विरोध गतिविधियों में लिप्त थी। लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई 2024 को राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में मंच पर पहुंची थीं। याचिकाकर्ता का कहना है कि कांग्रेस विधायक सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। इसके बावजूद उन्होंने विधायक पद से त्यागपत्र नहीं दिया है। दलबदल कानून के प्रकाश में उनका यह रवैया गैर कानूनी है। इसलिए सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से उक्त जानकारी पेश की गई। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि विगत 10 फरवरी को दोनों पक्षों के बयान विधानसभा अध्यक्ष ने दर्ज कर लिए हैं, इसके बावजूद भी उन्होंने कोई आदेश अभी तक पारित नहीं किया सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार उन्हें 90 दिनों में आदेश पारित करना था, युगलपीठ ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अगली सुनवाई की तिथि के संबंध में जानकारी चाही गई, जिस पर सरकार की ओर से उक्त जानकारी पेश करने में असमर्थता व्यक्त की गई। जिसे बाद न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने पक्ष रखा
