इंदौर: हत्या से जुड़े प्रकरण में आरोपी सोनम रघुवंशी को कोर्ट ने जमानत दे दी. कोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी के समय आरोपों की जानकारी स्पष्ट और प्रभावी तरीके से नहीं दी गई, जिससे आरोपी के बचाव के अधिकार प्रभावित हुए. इसी आधार पर उसे 50-50 हजार रुपए के मुचलके पर रिहाई के आदेश दिए गए.कोर्ट से मिले ऑर्डर के मुताबिक आरोपी को 9 जून 2025 को गिरफ्तार किया था और वह करीब 10 माह से जेल में बंद थी. मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अब तक 4 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं, जबकि ट्रायल सप्लीमेंट्री चार्जशीट आने के बाद से लंबित है.
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि गिरफ्तारी के समय ग्राउंड ऑफ अरेस्ट की वैधानिक जानकारी नहीं दी गई, जो संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन है. वहीं अभियोजन पक्ष ने इसे प्रक्रियात्मक त्रुटि बताते हुए कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी थी और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी हैं. कोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि उपलब्ध दस्तावेजों में आरोपों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और विभिन्न दस्तावेजों में धाराओं को लेकर विसंगतियां भी हैं. ऐसे में आरोपी को आरोपों की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल सकी, जिससे उसके बचाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा.
इन परिस्थितियों में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए माना कि गिरफ्तारी के आधार की प्रभावी जानकारी देना अनिवार्य है. इस मामले में इसका समुचित पालन नहीं हुआ, इसलिए आरोपी जमानत की हकदार है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी ट्रायल के दौरान सहयोग करेगी और तय शर्तों का पालन करना होगा.
जमानत के आधार और शर्तें
गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट व प्रभावी तरीके से नहीं बताए गए, दस्तावेजों में धाराओं को लेकर विसंगति, करीब 10 माह से जेल में थी आरोपी, ट्रायल लंबित, अब तक 4 गवाहों के बयान.
यह शर्तें रही
50-50 हजार रुपए के मुचलके पर रिहाई, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगी, हर पेशी पर कोर्ट में उपस्थित रहेगी, बिना अनुमति क्षेत्र नहीं छोड़ेगी.
