नयी दिल्ली 19 मार्च (वार्ता) जलशक्ति मंत्रालय की अनुदान मांगों पर लोकसभा में चर्चा शुरू हो गयी जिसमें सत्ता पक्ष ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काे आधुनिक भगीरथ कहा जबकि विपक्ष ने कहा कि सरकार की गांवों में नल से पानी पहुंचाने की योजना में अब कोई रुचि नहीं रही।
भारतीय जनता पार्टी के जगदंबिका पाल ने लोकसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने महाकुंभ का जो वक्तव्य दिया, वह दुनिया के लिए एक संदेश है। महाकुंभ में 66 करोड़ लोग आये, दुनिया के लिए यह एक अकल्पनीय घटना है।
श्री पाल ने कहा कि जल ही जीवन है तो जल ही विकास है। लोगों को सुरक्षित पेयजल मिले। हर राज्य में जल संकट रहा है। मिथिला में छह माह सूखा और छह माह बाढ़ रहती है। उत्तर पूर्वी उत्तर प्रदेश में ही यही स्थिति है। गुजरात एवं राजस्थान के अनेक इलाकों में पानी के लिए संघर्ष होता रहा है। गुजरात एव राजस्थान के लाेग गर्मियों में पलायन करते थे।
उन्होंने कहा कि भारत में विश्व की 18 प्रतिशत आबादी के लिए विश्व का चार प्रतिशत जल उपलब्ध है। सौराष्ट्र जल अवतरण से गुजरात के पानी की कमी वाले इलाकों की सूरत बदल गयी है। सरदार सरोवर योजनाओं को साकार करके श्री मोदी ने बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री, राज्य में जलक्रांति करने का काम किया था।
श्री पाल ने कहा कि जल के अनेक परियोजनाएं चल रहीं थीं लेकिन उनमें कोई समन्वय नहीं था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबको एकीकृत करके जलशक्ति मंत्रालय बनाया। हर घर में नल से जल पहुंचाया है। वर्ष 2025-26 के बजट में 99503 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है जो वर्ष 2024-25 के 51 हजार करोड़ रुपए से 93 प्रतिशत अधिक है। हर घर के लोगों को नल से जल मिले इसके लिए 190 प्रतिशत की वृद्धि की है। कृषि सिंचाई योजना में, अटल भूजल योजना आदि में दो से तीन गुना बजट अधिक दिया है।
श्री पाल ने कहा, “गंगा आयीं तो भागीरथ लाये थे आज हर घर में नल से जल मिलेगा तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नये भागीरथ के रूप में याद किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि पूर्वी राजस्थान नहर में 26 नदियों को जोड़ने की बात कही गयी थी। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार के समय नदी जोड़ो परियोजना को गंभीरता से नहीं लिया गया। जल संसाधन मंत्री ने कहा था कि इससे नदियों को जोड़ने से वे नष्ट हो जाएंगीं। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय की केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना 10 साल अटकी रही। मोदी सरकार ने पूर्वाेत्तर में भी काम किया। कोसी मेची नदी जोड़ो परियोजना भी अहम परियोजना है।
उन्होंने कहा कि सात दशकों को मिलायें तो उससे सात गुना अधिक काम मोदी सरकार ने किया है। सबसे पीछे केरल, झारखंड, पश्चिम बंगाल हैं। जल जीवन मिशन शुरू किया तो 17 प्रतिशत घरों में नल से जल मिलता था। 1571 प्रयाेगशालाओं को मान्यता मिली है। सबको सुरक्षित पेयजल मिल रहा है। हम गांवों में केवल टंकी बना कर पानी नहीं दे रहे हैं लेकिन महिलाओं को पानी की फील्ड टेस्टिंग किट दी है। आज 93 से अधिक खुले में शौच से मुक्त हो गये हैं। उत्तर प्रदेश में 51740 गांव हैं जहां स्वच्छता 92 प्रतिशत से अधिक है। सरयू नहर परियोजना आदि परियोजनाएं दशकों से लंबित थीं। जिनमें से 62 परियोजनाएं 10 साल में पूरी हो गयीं हैं।
उन्होंने कहा कि नमामि गंगे परियोजना में 2400 करोड़ रुपए किया है। 305 परियोजनाएं पूरी की गयीं हैं। 10.6 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई क्षमता मिलेगी। राष्ट्रीय जल मिशन के काम में नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल, सिंगापुर के साथ समझौते किये हैं। बाढ़ नियंत्रण सहित सभी प्रकार के जल प्रबंधन का काम किया जाएगा। गंदे जल के शोधन का काम केवल 30 प्रतिशत ही हाे पा रहा है। ये चिंता का विषय है, इसमें सबको शामिल हुआ है। दशकों तक नामुमिकन था वह हाे रहा है। आने वाले समय में देश के किसी भी कोने में पानी की किल्लत नहीं होगी। भारत नेपाल की 1575 किलोमीटर की सीमा में नेपाल से जो पानी भारत में आता है, उससे बहुत नुकसान हो रहा है। हमें नेपाल के साथ मिल कर जलाशयों का निर्माण किया जाये और उससे बिजली भी बनायी जाये।
भाजपा सांसद ने कहा कि कई स्थानों पर पानी में फ्लूराइड और आर्सेनिक की समस्या है। उसे भी खत्म करने की जरूरत है। कई जगह डार्क ज़ोन बन रहे हैं। इसका समाधान करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बंगलादेश के साथ द्विपक्षीय संयुक्त नदी बेसिन प्रबंधन का काम करने की जरूरत है। विश्व बैंक के साथ साझीदारी में भारत जल प्रबंधन का काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जलशक्ति मंत्रालय बना कर विदेशी समझौते किये हैं।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के टी आर बालू ने कहा कि जल जीवन मिशन 55 लीटर पेयजल हर व्यक्ति को 2024 तक मिल जाये लेकिन आज 2025 तक केवल 80 प्रतिशत ही पूरी हुई है। बाकी 20 प्रतिशत लोगों को भी दिये जाने की जरूरत है। सरकार ने आवंटन की पूरी राशि खर्च नहीं की है। इससे लगता है कि सरकार की इस योजना को लेकर दिलचस्पी खत्म हो गयी है। जल जीवन मिशन में संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र को कवर करना था। उन्होंने नदियों के जलाशयों को लेकर कोई योजना नहीं बनायी।
कांग्रेस के राहुल कस्वा ने कहा कि देश में प्रति व्यक्ति पानी की दर लगातार घट रही है और यह बहुत चिंताजनक स्थित है। राजस्थान में सबसे कम पानी प्रति व्यक्ति की दर से उपलब्ध है। वहां हमेशा पानी की कमी रहती है और जल संचयन पर पानी की व्यवस्था नहीं है। बिकानेर, नागौर आदि में पानी को लेकर अकाल की स्थिति रहती है जबकि सरकार सिर्फ योजना बनाती है और उसे जमीन पर नहीं उतारती है। राजस्थान में नहरों का जाल है लेकिन उनमें पानी नहीं है। उनका कहना था कि अगर पानी से आठ दस लाख हेक्टेयर की खेती होती है तो 18 से 20 लाख टन अन्न पैदा हो सकेगा और फिर देश को दालों का आयात नहीं कराना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी खेती किसानी करती है और किसानों के लिए कांग्रेस की सरकारों ने ही दूरदृष्टि अपनाई थी। सरकार बेकार हो रहे पानी को उपयोग के लिए उपलब्ध करा सकती है लेकिन इस बारे उसकी कोई ठोस योजना नहीं है जिसके कारण पानी बर्बाद होता है। सरकार नारे खूब देती है कि हर खेत को पानी देंगे लेकिन असलियत सबके सामने है।
उन्होंने कहा कि सरकार नदी जोडों की बात करती है लेकिन दिक्कत यही है कि उसके लिए बजट को घटा दिया गया है। इसी तरह से नमामी गंगे योजना है जिसके लिए सरकार ने बजट घटा दिया है। सरकार बातें खूब करती है और सबको अच्छी लगती है लेकिन हकीकत उसके ठीक विपरीत होती है। गांव में आज भी लोगों को दिक्कत है और संसदीय क्षेत्र से हर दिन यही फोन आता है कि गांव में पानी नहीं मिल रहा है। सरकार विकास के लिए पैसे खूब खर्च कर रही है लेकिन सिंचाई के लिए पैसे नहीं दिए जा रहे हैँ। जलजीवन मिशन की हालत यह है कि जितना एंट्री है कि इतने घरों को पानी दे दिया है लेकिन हालात दावों के विपरीत है।
समाजवादी पार्टी के वीरेंद्र सिंह ने कहा कि पहले की सरकारों ने उत्तर प्रदेश में नहरों का जाल बिछा दिया था लेकिन उसके बाद जो दूसरी सरकारें आई उन्होंने इन येाजनाओं पर ध्यान नहीं दिया और इसका परिणाम यह हुआ कि वहां नहरें बेकार पड़ी हैं और उनकी जर्जर हालत देखने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार हर घर जल से नल का नारा देकर जल जीवन मिशन के तहत योजना चला रही है लेकिन जो नल लगाए जा रहे हैं उनमें पानी ही नहीं आता है और यदि किसी नल से पानी भरने का प्रयास करे तों पहले पानी नहीं होगा और यदि आ रहा है तो एक बाल्टी पानी भरने में आधा घंटे का समय लग जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस के बापी हलधर ने कहा कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव कर रही है और पश्चिम बंगाल के साथ न्याय नहीं हो पाता है। वहां परियोजनाओं के लिए पैसा नहीं मिल रहा है राज्य सरकार को खुद लोगों को कई परियोजनाओं के लिए पैसा देना पड़ रहा है जबकि लोगों को पानी पहुंचाने की योजना केंद्र सरकार की है। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वच्छता को लेकर सरकार और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े बड़े दावे करते हुए कहा था कि गंगा मां उन्हें बुला रही है लेकिन गंगा की स्वच्छता का काम नहीं हो रहा है और श्री मोदी गंगा को भूल गये हैं। नमामी गंगा योजना के नाम पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन गंगा का प्रदूषण कम नहीं हो रहा है। स्वच्छता के नाम पर बड़े बड़े बोर्ड लगाकर उपलब्धि बताने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है क्योंकि सरकार शौचालय बनाने के लिए जो पैसा दे रही है वह बहुत ही कम है। उनका कहना था कि आपदा पर किसी का नियंत्रण नही है लेकिन प्राकृतिक आपदा प्रबंधन में जो मदद केंद्र से मिलनी चाहिए वह पश्चिम बंगाल को नहीं मिल रही है।
तेलगु देशम पार्टी के बस्तीपति नागराजू ने कहा कि आंध्र प्रदेश में पानी की ज्यादा सुविधाएं दी जानी चाहिए क्योंकि वहां कई हिस्सों में भूजल बहुत कम हो गया है जिसे बढाने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस काम के लिए निधियों का पैसा समय पर नहीं मिल रहा है जिसके कारण योजनाओं को पूरा करने में दिक्कत हो रही है। यदि निधियों का पैसा समय पर मिलता है तो इसका सबको लाभ मिलेगा और भारत को 2047 तक विकसित करने का जो लक्ष्य है उसके लिए आंध्र प्रदेश को जल सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए उसके हिस्से की निधि उसे तत्काल दी जानी चाहिए।
जनता दल यू की लवली आनंद ने कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र में जल संकट बना हुआ है और बरसात में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो जाती है। उन्होंने बिहार में बाढ का संकट समाप्त करने के लिए नेपाल में हाई डैम बनाने की मांग की और कहा कि यदि ऐसा होता है तो बिहार में किसानों के संकट का स्थायी समाधान हो जाएगा। राज्य में भूजल की बहुत समस्या है इसलिए जलाशयों तथा तालाबों में जल की उपलब्धता के लिए काम हो ताकि सबको पर्याप्त जल मिल सके। शिवसेना के राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे ने कहा कि 2027 में नासिक में कुंभ होना है इसलिए सरकार को और राशि आवंटित करनी चाहिए। नासिक शहर में नदी के पानी की स्वच्छता आवश्यक है। जल शक्ति मंत्रालय की नदी जोड़ने की योजना है उस पर काम होना चाहिए ताकि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जल की समस्या कम हो।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के नीलेश ज्ञानदेव लंके ने जलशक्ति मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा में अपनी बात रखते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि पानी प्रकृति का वरदान है उसे संभालकर इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर घर जल योजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है लेकिन इसमें उनके संसदीय क्षेत्र में भ्रष्टाचार के मामले सामने आये हैं। ठेकेदारों को काम से अधिक का भुगतान करने का मामला आया है। उन्होंने कहा कि पानी की पाइप जो डाली गई है उसकी गुणत्ता भी सही नहीं है।
शिव सेना धैर्यशील माने ने कहा कि सत्तर साल में बहुत सारी सारी सरकारें हुई लेकिन इस सरकार ने भक्ति और शक्ति के रूप में काम किया है। पहले पानी के लिए गांव में लंबी दूरी तय करना पड़ता था लेकिन सरकार ने लोगों के घरों तक जल पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जल जीवन के माध्यम से रिकार्ड स्तर पर घरों में पानी पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर, सांगली और सतारा में पिछले कुछ साल से बाढ आ रही जिससे लोगों को भारी नुकसान हो रहा है सरकार को इस मामले में गंभीरता से विचार इसे रोकना का उपाय करना चाहिए। पानी पहुंचाने के लिए रास्तों को खोद दिया जाता है जिससे लोगों को दिक्कतें आ रही है। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे पानी की पाइप भी डाली जाए और खोदी गई सड़क को भी बनाया जाए।
भाजपा के राजकुमार चाहर ने कहा कि 2019 में जब सांसद बनकर आया तो उनके संसदीय क्षेत्र में जल संकट था। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या की वजह से मुगल शासक अकबर को फतेहपुर सिकरी को छोड़कर जाना पड़ा था लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोशिशों से पूरे इलाके में पानी की समस्या का समाधान हो गया है। उन्होंने कहा कि जब जल जीवन मिशन योजना आई तीन करोड़ घरों में पानी जाता था लेकिन अब पंद्रह करोड़ घरों में नल से जल आ रहा है।
उन्होंने कहा कि कोटा से संतुलित पानी छोड़ जाए ताकि हमारे संसदीय क्षेत्र में बाढ से बचाव हो सके। उन्होंने कहा दिल्ली में सरकार बदली है और अब उम्मीद यमुना साफ होगी और हमारे यहां स्वच्छ जल आयेगा।
कांग्रेस के मोहम्मद जावेद ने कहा कि जल ही जीवन है लेकिन मौजूदा सरकार इसकी महत्ता नहीं समझ पा रही है। उन्होंने कहा सरकार ने बजट में कम राशि का आवंटन किया गया है। नीति आयोग की रिपोर्ट है जिसमें कहा गया है कि सत्तर प्रतिशत जल में मिलावट है। इसके बावजूद सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। सिंचाई तो दूर लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन लाई गई लेकिन नल है तो जल नहीं और सड़कें अलग से खोद दी गई है।
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राजेश वर्मा ने कहा कि सरकार हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए जो काम कर रही है वह सराहनीय है। जहां एक तरफ मंत्रालय आम लोगों को स्वच्छ जल मुहैया करा रही है वहीं नदियों को स्वच्छ करने का काम किया है। बिहार में 38 में से 19 जिले बारिश की कमी से प्रभावित होते हैं तथा बड़ी आबादी बाढ से भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने खगड़िया लोकसभा कई क्षेत्रों में कोशी नदी से कटाव की समस्या उत्पन्न है उसके स्थाई समाधान के लिए उपाय किया चाहिए। बिहार के कई जिलों में पानी में आर्सेनिक की बढोत्तरी देखी जा रही है इसका भी स्थाई समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ और सूखे से निपटने के लिए सिर्फ राहत नहीं बल्कि स्थाई समाधान किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय जनता दल के अभय कुमार सिन्हा ने जल शक्ति अनुदान की मागों के विरोध में अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार किस मिशन के तहत काम कर रही है कि पिछले साल सत्तर हजार करोड़ रुपये जल जीवन मिशन का आवंटन किया गया था जिसमें पचास हजार करोड़ रुपये बचे रह गये। बिहार में 2023 -24 में जल जीवन मिशन के तहत 55 करोड़ रुपये मिले थे और तीन साल बाद भी डबल इंजन की सरकार इसको खर्च नहीं कर पाई यह बड़ी दुर्भाग्य की बात है। उन्होंने नल जल योजना की बिहार में जांच कराने की मांग की। इस योजना से जितने भी वार्डों में काम हुआ है उसमें से आधे में लोगों को पानी नहीं मिल रही है।
आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा कि जल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है जिससे भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार हो इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए गिरते जल स्तर को ठीक करने के लिए उपाय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को भू जल प्रबंधन करना चाहिए। इसके लिए लोगों को भी जागरुक करने की जरूरत है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अमराराम ने कहा कि सरकार बड़ी बड़ी कंपनियों के लिए चिंतित है लेकिन देश के प्यासे लोगों के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि आज भी सत्तर प्रतिशत लोगों को भूजल से प्यास बुझाई जाती है। लोगों को प्रदूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा जिससे लोगों बीमारियों से ग्रसित हो रहे है। सरकार गांव के लोगों के लिए नल से जल देने के लिए जल जीवन मिशन की योजना लेकर आई जो सराहनीय है लेकिन इस योजना की प्रगति में राजस्थान सबसे पीछे है। राजस्थान के एक प्रतिशत गांव भी नहीं है जहा शत प्रतिशत घरों में नल से जल पहुंच पाया है।
वाईएसआर कांग्रेस के वाई एस अविनाश रेड्डी ने मांग की कि पोलावरम बांध परियोजना में बांध की ऊंचाई पूर्वनिर्धारित से बदली नहीं जानी चाहिए और ना ही जलाशय की क्षमता घटायी जानी चाहिए। उन्होंने आंध्र प्रदेश की वृहद रायलसीमा परियोजना की समीक्षा करने एवं अन्य परियोजनाओं को भी पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने आंध्र प्रदेश के लिए जल जीवन मिशन के लिए पर्याप्त आवंटन करने की मांग की।
तृणमूल कांग्रेस की डॉ. प्रतिमा मंडल ने कहा कि भारत के पास दुनिया का केवल चार प्रतिशत पानी है जबकि आबादी 17 प्रतिशत है। दिल्ली में 2020 में भूजल सूख गया है। जल जीवन मिशन के लिए आवंटित धनराशि का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। हर घर नल से जल का लक्ष्य 2024 से बढ़ाकर 2028 कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि क्या महाकुंभ के दौरान गंगा का पानी स्वच्छ था। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण की रिपोर्ट में त्रिवेणी संगम में गंगा के पानी में प्रदूषण की बात कही गयी थी। उन्होंने सुुंदरवन क्षेत्र के मुद्दों और घाटाल परियोजना की ओर ध्यानाकर्षित किया। उन्होंने उत्तर बंगाल के जिलों में भूटान से आने वाली 50 नदियों के कारण बाढ़ एवं मिट्टी के कटाव को रोकने की भी मांग की।
समाजवादी पार्टी के पुष्पेन्द्र सरोज ने कहा कि जलशक्ति मंत्रालय के अनुदान मांगों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन विफल हो गया है। नल से पानी की बजाय आंसू आ रहे हैं। इसका आवंटन 70 हजार करोड़ से घटा कर 22 हजार करोड़ रुपए क्यों कर दिया गया। उन्होंने मंत्री को चुनौती दी कि वह उनके क्षेत्र कौशम्बी में इस योजना का कोई क्रियान्वयन दिखा दें। उन्होंने उत्तर प्रदेश के साथ भेदभाव का आरोप लगाया कि कहा कि जल जीवन मिशन अब जल झूठ मिशन बन कर रह गया है। पूर्वान्चल एवं बुन्देलखंड में अमृत तालाब खोदे गये उनमें एक भी बूंद पानी नहीं है। नमामि गंगे मिशन में दस साल में 20 हजार करोड़ रुपए निवेश लेकिन परिणाम शून्य रहा। उन्होंने कहा कि कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाकुंभ पर भाषण दिया लेकिन मृतकों के लिए एक शब्द नहीं बोला। पाप धोने आयी गंगा सरकारी पापों से भर गयी है।
भाजपा की स्मिता उदय वाघ ने कहा कि विदर्भ, मराठवाड़ा में जल के संकट से निकालने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। जल गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रयाेगशाला स्थापित की गयी है और जल संरक्षण के लिए जनजागृति अभियान चलाने की जरूरत है। जलगांव क्षेत्र में गंभीर जल संकट पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन से जल की आपूर्ति की सराहना की और कहा कि श्रमिकों के भुगतान जल्द किया जाये।
कांग्रेस के एंटो एंटनी ने कहा कि हम जल जीवन मिशन के उद्देश्य की सराहना करते हैं लेकिन केरल में इसकी प्रगति असंतोषजनक है। 54 प्रतिशत लोगों को नल से जल मिल पा रहा है। प्रोजेक्ट आधा अधूरा पड़ा है। फंडिंग का सूत्र 50 प्रतिशत केन्द्र, 25 प्रतिशत राज्य एवं 25 प्रतिशत स्थानीय निकाय से देने का है। लेेकिन यह काम नहीं कर पा रहा है। उन्होंने पानी की गुणवत्ता को एक रिपोर्ट को उद्धृत करते हुए कहा कि केरल सिक्किम त्रिपुरा में नलों में पीने योग्य पानी नहीं आता है। यदि हम इस मिशन को सफल बनाना चाहते हैं तो तुरंत की इसे सही करने के कदम उठाने पड़ेंगे।
आम आदमी पार्टी के गुरमीत सिंह मीत हेयर ने पंजाब में पानी के दोहन एवं पानी की गुणवत्ता पर चिंता जतायी। उन्होंने हरियाणा एवं पंजाब के बीच यमुना के जल के बंटवारे के समझौते के क्रियान्वयन की मांग की। जल शक्ति मिशन में जो पानी उपलब्ध कराया गया है, वह पीने योग्य नहीं है। उन्होंने बांधों में सिल्ट जमा होने का मुद्दा उठाया और सिल्ट साफ करने की मांग की ताकि पानी का राज्य में उपयोग हो सके और पाकिस्तान में व्यर्थ ना बह जाये।
आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लमीन के असदुद्दीन ओवैसी ने प्रस्ताव का विरोध किया। द्रमुक के थंगा तमिलसेल्वन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के के सुब्बारायण ने भी चर्चा में भाग लिया।
भाजपा के बसवराज बोम्मई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में जो काम बहुत कठिन हैं वे सब हो रहे हैं,इसलिए यह कहावत सही है कि मोदी है तो मुमकिन है। उन्होंने कहा कि अंतर जल विवाद निवारण अधिनियम ज्यादा विवाद पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि जल न्यायाधिकरण का गठन किया जाना चाहिए। पानी को लेकर कर्नाटक के साथ अन्याय हो रहा है और राज्य के लोगों को पानी नहीं मिल रहा है और वहां के लोगों के साथ न्याय नहीं हो रहा है लेकिन ऊपर वाला न्याय देगा। काबेरी-महानदी के जोड़ने की मांग को ठुकराया जा रहा है फिर भी उन्हें उम्मीद है कि अंतरराज्यीय जल विवाद को सुलझा दिया जाएगा।
निर्दलीय मोहम्मद हनीफा ने कहा कि करगिल का बड़ा इलाका है ,वहां पानी की बहुत किल्लत है। वहां पानी के अभाव में किसानों को एक फसल पाना मुनासिब नहीं हो रहा है। पहले वहां बहुत हिमपात होता था लेकिन इस बार बहुत कम हिमपात हुआ है। उनका कहना था कि लोगों को पानी के बिना संकअ से जूझना न पड़े और समस्या का समाधान आसानी से निकले इसके लिए केंद्र सरकार को समिति गठित करनी चाहिए।
कांग्रेस के रकीबुल हुसैन ने कहा कि आपदा प्रबंधन की बात की जाती है लेकिन असम के लिए बाढ़ की जो समस्या है उसके समाधान के लिए काम करने की जरूरत है। उनका कहना था कि असम में ब्रह्मपुत्र तथा उसके साथ जुड़ी कम से कम 30 नदियों से बाढ़ के कटाव की जो स्थिति होती है उससे लोगों को कितनी दिक्कत होती है यह बात दिल्ली में बैठे लोगों को समझाना कठिन हो गया है। उनका कहना था कि ब्रह्मपुर असम की जीवन रेखा है लेकिन जब यह बाढ़ का रूप लेती है तो एक ही झटके में असम के किसानों की बड़ी भूमि को बहाकर ले जाती है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र के कारण पैदा होने वाली आपदा के संकट से निपटने के लिए ब्रह्मपुत्र बोर्ड की भूमिका अहम हो सकती है इसलिए इस बोर्ड की आर्थिक को बढ़ाया जाना चाहिए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एमएल के सुदामा प्रसाद ने कहा कि सरकार जल की उपलब्धता की दिशा में कोई काम नहीं कर रही है। सरकार को बड़े बांध का निर्माण कर लोगों को जल उपलब्घ कराना चाहिए लेकिन सरकार अपने हित के लिए काम करती है। किसान ऊंचे बांधों का विरोध करती है लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं देती है। सोन नदी पर बांध बनाने की बात की जाती है इस पर सरकार ध्यान नहीं देती है। उनके संसदीय क्षेत्र में बाढ से तबाही होती है लेकिन यदि सरकार इंद्रपुरी जलाशय का निर्माण कर गंगानदी से एक नहर बनाई जाय इससे लोगों की समस्या का समाधान होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में किसान को नहीं कल कारखानों को पानी दिया जा रहा है जिससे नदियां दूषित हो रही है। सरकार हर घर में नल से जल देने की बात कर रही है और इसके लिए सड़कों को खोदा जा रहा है ,नल लगाए जा रहे हैं, लेकिन नलों से पानी नहीं आ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार हर घर को नल से जल की योजना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इस योजना को विफल करार दिया है।
शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर ने कहा कि जमीन के जल का अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है और कई क्षेत्रों में जल स्तर बहुत नीचे चला गया है। उनका कहना था कि पंजाब का पानी हरियाणा को दिया जा रहा है लेकिन जब बाढ़ आती है तो उसका खामियाजा पंजाब को ही झेलना पड़ता है। लोगों की जान चली जाती है, उनके पशु मारे जाते हैं, खेत बर्बाद होते हैं और घर तबाह हो जाते हैं लेकिन सरकार ध्यान नहीं देती है। उनका कहना था कि जब पानी कम होता है तो दूसरे राज्यों को पानी दिया जाता है और जब ज्यादा पानी के कारण बांध को खोला जाता है तो इसका खामियाजा पंजाब के लोगों को झेलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं में दूसरे राज्यों के लिए योजनाएं होगी लेकिन पंजाब के लिए उसके पास कोई योजना नहीं है।
कांग्रेस के एडवोकेट डीन कुरियाकोस ने कहा कि केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन खासकर केरल में पूरी तरह से विफल हो चुकी है। इस योजना के नाम पर पैसे बहाए जा रहे हैं लेकिन लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
समाजवादी पार्टी के राम शिरोमणि वर्मा ने कहा कि जल ही जीवन है यह हम सब जानते है लेकिन जलसंकट पूरे देश में पड़ा है। उत्तर प्रदेश समेत बीस राज्यों में पेयजल में हानिकारक पदार्थ मिल रहा है। सरकार को लोगों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। वर्तमान बजट में उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने सभी सांसदों को दो दो हज़ार हैंड पंप देने की आवश्यकता है
भाजपा की मंजू शर्मा ने कहा हवा के अलावा जीने के लिए पानी अत्यंत आवश्यक है। जल संसाधन प्रबंधन, स्वच्छ जल की उपलब्धता और हमारी नदियोंके संरक्षण के लिए जल शक्ति मंत्रालय अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण इलाकों में नल से जल पहुंचाया जा रहा है। जल को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता इस बात से पता चलता है कि बजट में इस मिशन के लिए समुचित आवंटन किया गया है।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि जिस देश ने नदी को भगवान नहीं माना वह सवच्छ है लेकिन जिसने नदी को भगवान माना वह मैली हो गई है। देश में 90 प्रतिशत बीमारी पानी की वजह से है। दुनिया के अन्य देशों में देश के लोगों के लिए काम किया जाता है वहाँ हिंदू मुसलमान नहीं होता है। उन्होंने कहा कि पिछले ग्यारह साल में न तो यमुना साफ़ हुई और न ही गंगा साफ़ हुई है जबकि प्रधानमंत्री ने चुनाव में कहा था कि उन्हें गंगा मैया ने बुलाया है। उन्होंने कहा पहले नदी वरदान होती थी अब अभिशाप बन गई है। नल जल योजना मधेपुरा पूर्णिया के गरीब के घरों में नहीं पहुँचा है।
सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि जिस प्रकार सरकार ने जल शक्ति मंत्रालय को महत्ता दी है उससे लगता है यह एक मिशन को लेकर आगे चल रहा है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन सरकार की अच्छी योजना है जिसका लोगों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन में सिक्किम हमेशा प्रथम रहा है।
यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी के जोयंतो बसूमतारी जयंतो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने बहुत प्रगति की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में जो आवंटन किया है उससे जल संसाधन पर अच्छा कम होगा। जल जीवन मिशन से लोगों के जीवन में बदलाव आया है लोगों को घरों में ही पीने का पानी मिलने लगा है।
शिव सेना के श्रीरंग अप्पा बारने ने कहा कि देश भर के नदियों को जोड़ने का काम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने शुरू किया था लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ है। नदियों के जल को स्वच्छ करने की आवश्यकता है क्योंकि ज्यादातर नदियों का पानी पीने योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन का कम राज्यों में सही ढंग से नहीं हो रहा है इसलिए केंद्र की ओर से राज्यों दिए गए पैसों की जांच की जानी चाहिए।
भाजपा के प्रवीण पटेल ने कहा कि जब यूपीए की सरकार थी तब सत्रह हज़ार करोड़ से कुछ अधिक का बजट था लेकिन इस बार जल शक्ति मंत्रालय का बजट छह गुना अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ कुम्भ के आयोजन से पहले जल शक्ति मंत्रालय ने कईकाम किए जो बहुत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि अपने संसदीय क्षेत्र के कई इलाक़ों में हर साल कटाव का सामना करना पड रहा है जिसके लिए सरकार को कुछ उपाय करना चाहिए।
