सीहोर। पुत्र के जन्म से पिता को थोड़ा ही पुण्य मिलता है किंतु जिस घर में जितनी बेटियां होती है वहां घर और पिता उतना भाग्यशाली होता है.
उक्त उद्गार ग्राम बड़ी कुलांस वर्मा कृषि फार्म पर धर्म रक्षक मंदिर जीर्णोद्धारक संत श्री श्री 108 पंडित दुर्गा प्रसाद जी कटारे बाबा जी के सानिध्य में चल रही शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा एवं श्री नर्मदेश्वर शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास परम गौभक्त क्रांतिकारी राष्ट्रीय संत पंडित मोहितरामजी पाठक ने व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि दक्ष प्रजापति की सभी पुत्रियां गुणवती थीं. फिर भी दक्ष के मन में संतोष नहीं था. वे चाहते थे उनके घर में एक ऐसी पुत्री का जन्म हो, जो सर्व शक्ति-संपन्न हो एवं सर्व विजयिनी हो. दक्ष एक ऐसी ही पुत्री के लिए तप करने लगे. तप से प्रसन्न होकर मां बोली मैं पुत्री रूप में तुम्हारे यहां जन्म धारण करूंगी. मैं सती के रूप में जन्म लेकर अपनी लीलाओं का विस्तार करूंगी. फलत: भगवती आद्या ने सती रूप में दक्ष के यहां जन्म लिया. सती दक्ष की सभी पुत्रियों में सबसे अलौकिक थीं.
