जम्मू, 16 अगस्त (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि किश्तवाड़ जिले में बादल फटने से प्रभावित चोसिटी गांव में लगभग 60 लोगों की मौत हो गयी है, जबकि 70 से 80 लोग अभी भी लापता हैं।
कश्मीर से सिंथन टॉप होते हुए शुक्रवार शाम किश्तवाड़ पहुंचे मुख्यमंत्री ने शनिवार को बादल फटने से प्रभावित गांव का दौरा किया और चल रहे बचाव अभियान की समीक्षा की तथा प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।
चोसिटी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “अभी तक मरने वालों की संख्या लगभग 60 है, जबकि 70 से 80 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी संख्या में उतार-चढ़ाव हो सकता है।” उन्होंने हालांकि कहा कि 500 या 1000 लोगों के लापता होने की खबरें गलत हैं।
श्री अब्दुल्ला ने कहा, “बचाव अभियान चलाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों की पर्याप्त टीमें तैनात हैं।” उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों के बीच तत्काल राहत वितरित कर दी गयी है और अधिकारियों को पीड़ितों तथा प्रभावित परिवारों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष का भी उपयोग करने का निर्देश दिया है।
बादल फटने से प्रभावित परिवारों के दूसरे जगह ले जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “उन्हें वर्तमान स्थानों से दूसरी जगह ले जाने की मांग की गयी है, लेकिन इसके लिए विशेषज्ञों की एक टीम से परामर्श करने की आवश्यकता है जो सभी आवश्यक निवारक उपायों पर विचार करेगी।” उन्होंने कहा, “मैं प्रभावित परिवारों की भावनाओं को समझ सकता हूँ क्योंकि उनके कई लापता प्रियजनों का अभी भी कोई पता नहीं चल पाया है। वे चाहते हैं कि उनका पता लगाया जाए, चाहे वे जीवित हों या मृत।”
पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की हालिया घटनाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी इलाके बादल फटने के लिए प्रवण हैं, और ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए व्यापक व्यवस्था करने के लिए विशेषज्ञों से परामर्श करने की आवश्यकता है।
इस बीच अधिकारियों ने बताया कि पद्दार में लापता लोगों के रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों को जानकारी साझा करने के लिए हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी कल रात घटनास्थल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री से बात कर स्थिति की समीक्षा की थी।
गौरतलब है कि अचानक आयी बाढ़ में 16 घर और सरकारी परिसर, तीन मंदिर, पनचक्की, एक पुल और लगभग 20 वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे के समय पद्दार में श्री मचैल माता की वार्षिक तीर्थयात्रा चल रही थी और जब यह त्रासदी घटी, तब श्रद्धालु चोसिटी गाँव यात्रा के अंतिम पड़ाव में सामुदायिक रसोईघर के लिए रुके हुए थे।
