
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में सेना के एक हवलदार द्वारा हाईकोर्ट के नियम-48 की वैधता को कटघरे में रखते हुए चुनौती दी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल व विधि विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
यह मामला याचिकाकर्ता हवलदार संजय कमार अहिरवार की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, संजय कुमार शर्मा व रोहिणी शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि हाईकोर्ट के नियम का वह प्रावधान चुनौती के योग्य है, जिसके अनुसार दोषसिद्ध व्यक्ति की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका तभी सुनवाई योग्य है, जब वह न्यायालय के समक्ष सरेंडर कर चुका हो अथवा न्यायिक अभिरक्षा में हो। सुप्रीम कोर्ट के विवेक राय प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि झारखंड हाईकोर्ट के समान नियम को चुनौती दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने यह स्वीकार किया था कि हाईकोर्ट को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के अंतर्गत प्राप्त अंतर्निहित शक्तियों के आधार पर विशेष परिस्थितियों में सरेंडर की अनिवार्यता से छूट देने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि बाद में दौलत सिंह प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि चूंकि धारा 389 में सरेंडर से छूट का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसलिए धारा 482 के तहत ऐसी राहत नहीं दी जा सकती। याचिका में कहा गया है कि इसी निर्णय के बाद मप्र हाईकोर्ट में नियम-48 के अंतर्गत दायर छूट आवेदन निरस्त किए जाने लगे हैं। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों से जवाब तलब किया है।
