सोन नदी तट पर रेत खनन गतिविधियों से पर्यावरणीय संतुलन पर चिंता, निगरानी बढ़ाने की मांग

सिंगरौली। पुलिस चौकी बगदरा क्षेत्र में इन दिनों रेत से जुड़ी गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। सोन नदी के किनारे स्थित सोन घड़ियाल अभ्यारण्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रेत के उत्खनन और परिवहन की सूचनाएं सामने आ रही हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में रेत के परिवहन की गतिविधियां लगातार जारी हैं। वहीं, संबंधित विभागों की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अभ्यारण्य क्षेत्र, जो घड़ियाल और मगरमच्छ जैसे दुर्लभ जलीय जीवों के संरक्षण के लिए जाना जाता है, वहां इस प्रकार की गतिविधियां वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को प्रभावित कर सकती हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सोन नदी से हो रही लगातार रेत निकासी के कारण नदी के प्राकृतिक स्वरूप में बदलाव आ रहा है। इससे जलधारा, किनारों की संरचना और जलीय जीवों के जीवन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पूर्व में भी ऐसे मामलों में जलीय जीवों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे अब सतर्कता की आवश्यकता और बढ़ गई है।

इसके अलावा, क्षेत्र से होकर गुजरने वाले मार्गों पर रेत से भरे वाहनों की आवाजाही भी चर्चा का विषय बनी हुई है। नागरिकों का मानना है कि यदि इस पर प्रभावी निगरानी और नियमन नहीं किया गया, तो पर्यावरणीय असंतुलन की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

पूरे मामले को लेकर प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए, ताकि अभ्यारण्य क्षेत्र की जैव-विविधता और प्राकृतिक संतुलन को सुरक्षित रखा जा सके।

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