महू: मध्य भारत अस्पताल में पिछले चार माह से शिशु रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशन) नहीं है, जिससे नवजात शिशुओं और बच्चों के इलाज में गंभीर समस्या आ रही है. हालांकि, अस्पताल में पीडियाट्रिशन का पद स्वीकृत है, लेकिन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की जानकारी में होने के बावजूद नियुक्ति नहीं हो पाई है.जानकारी के मुताबिक, एनबीएसयू (नवजात शिशु विशेष देखभाल इकाई) से प्रतिदिन औसतन दो नवजात शिशुओं को इंदौर रेफर किया जा रहा है. ओपीडी में रोजाना लगभग 40 बच्चे इलाज के लिए आते हैं, जिनमें से करीब 15 बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है. 0 से 14 वर्ष तक के बच्चों को फिलहाल नाक, कान, गले के डॉक्टर देख रहे हैं, जबकि गंभीर मरीजों को तुरंत रेफर कर दिया जा रहा है.
रेफर में भी आ रही दिक्कत
रेफर करने की प्रक्रिया में भी कई दिक्कतें सामने आ रही हैं. सिजेरियन मामलों में गायनेकोलॉजिस्ट रेफर के कागजों पर हस्ताक्षर करने में हिचकिचाते हैं, जिसके कारण सामान्य डॉक्टरों से हस्ताक्षर करवाकर रेफर किया जा रहा है. सिजेरियन डिलीवरी और प्री-टर्म डिलीवरी (समय से पहले जन्म) के बाद नवजात शिशुओं के लिए पीडियाट्रिशन की उपस्थिति अनिवार्य होती है, लेकिन यहां मध्य भारत अस्पताल में सामान्य डॉक्टरों के भरोसे ही काम चल रहा है. पीडियाट्रिशन न होने से फॉलो-अप मामलों की संख्या में भी काफी कमी आई है.
अन्य स्टॉफ की भी कमी
पीडियाट्रिशन के अलावा, एनबीएसयू वार्ड में भी स्टॉफ की कमी बनी हुई है. यहां चार प्रशिक्षित स्टॉफ स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो ही कार्यरत हैं. दो नर्स और एक इंचार्ज के भरोसे ही पूरा वार्ड चल रहा है. जानकारी अनुसार मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रभारी को भी इस स्थिति से कई बार अवगत कराया गया, लेकिन लंबे समय से नियुक्तियां नहीं हुई हैं. इस गंभीर स्थिति पर कलेक्टर ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति जल्द की जाएगी.
इनका कहना है…
अगर सिविल अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है, तो तत्काल मामले को संज्ञान में लिया जाएगा और जल्द ही शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाएगी, ताकि आमजन को परेशानी ना हो.
= शिवम वर्मा, कलेक्टर, इंदौर।
