जल संरक्षण का खंडवा मॉडल देश में दूसरा स्थान पाकर रचा इतिहास

खंडवा: जब संकल्प शक्ति और जनभागीदारी का संगम होता है, तो परिणाम ऐतिहासिक होते हैं। इसका जीवंत उदाहरण पेश किया है खंडवा ने, जो केंद्र सरकार के ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ की राष्ट्रीय रैंकिंग में देश के शीर्ष दो जिलों में शामिल हो गया है। 22 अप्रैल को जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्षा जल संचयन और जल प्रबंधन के मामले में खंडवा पूरे भारत में द्वितीय स्थान पर चल रहा है।

खंडवा की उपलब्धि के मुख्य स्तंभ खंडवा जिले ने यह मुकाम किसी चमत्कार से नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से किए गए ‘मिशन मोड’ कार्यों से हासिल किया है:
87 हजार + जल संरचनाएं: जिले में रिकॉर्ड समय के भीतर 87 हजार से अधिक जल संचयन संरचनाओं का निर्माण और पुनरुद्धार किया गया है।वैज्ञानिक दृष्टिकोण: जिले में केवल गड्ढे नहीं खोदे गए, बल्कि बोरवेल रिचार्ज सिस्टम और रिचार्ज शाफ्ट जैसी आधुनिक और कम लागत वाली वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया गया है।शहरी एवं ग्रामीण तालमेल: जहां ग्रामीण क्षेत्रों में अमृत सरोवर और खेत तालाबों पर जोर दिया गया, वहीं शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य रूप से प्रोत्साहित किया गया।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के विजन को धरातल पर उतारा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” को खंडवा जिला प्रशासन और स्थानीय नागरिकों ने एक जन-आंदोलन बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मूल मंत्र “कैच द रेन” (वर्षा जल का संग्रह करें) को खंडवा ने न केवल अपनाया, बल्कि उसे धरातल पर उतारकर देश के सामने एक मिसाल पेश की है।
जनभागीदारी से बदली तस्वीर
राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी श्री अवि प्रसाद के अनुसार, खंडवा की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ जनभागीदारी का है। जिले की विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं, पंचायतों और आम नागरिकों ने जल संकट को एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया और श्रमदान व संसाधनों के माध्यम से जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपना योगदान दिया।
भविष्य की राह: जल सुरक्षा से समृद्धि
खंडवा का यह प्रदर्शन न केवल रैंकिंग तक सीमित है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे:
1. भूजल स्तर में सुधार: हजारों संरचनाओं के माध्यम से जमीन के नीचे का जल स्तर ऊपर आएगा।
2. कृषि को मजबूती: खेत तालाबों और कूप रिचार्ज से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।
3. पेयजल संकट से मुक्ति: आने वाली गर्मियों में खंडवा को जल संकट से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।
> खंडवा ने सिद्ध कर दिया है कि यदि समाज और सरकार मिलकर कार्य करें, तो प्रकृति के अनमोल रत्न ‘जल’ को सुरक्षित करना संभव है। यह उपलब्धि हर खंडवा वासी के परिश्रम का परिणाम है।

रैंकिंग सारांश:
* प्रथम: डिंडोरी (म.प्र.)
* द्वितीय: खंडवा (म.प्र.)
* लक्ष्य: 30 जून 2026 तक जल सुरक्षा का पूर्ण लक्ष्य प्राप्त करना।

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