ग्वालियर: बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने समाज को एकजुट रहने और संस्कारों को सहेजने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हम अपनी संपत्ति और व्यापार को तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाकर रखते हैं, लेकिन उतना ही आवश्यक है कि हम संस्कार भी अपनी पीढ़ियों को सौंपें, ताकि समाज और संस्कृति सुरक्षित रह सके।बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि देश में आरएसएस न होता, तो आज जितने हिंदू बचे हैं, शायद उतने भी न होते। उन्होंने संगठन को समाज को जोड़ने वाली शक्ति बताया।
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए जातियां रहें, लेकिन जातिवाद समाप्त होना चाहिए। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि जहां ताकत होती है, वहां एकता की शक्ति अवश्य होती है। उन्होंने समाज से आपसी मतभेद भुलाकर संगठित रहने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि यदि समाज में एकता रहेगी तो कोई भी ताकत उसे परास्त नहीं कर पाएगी। हिंदू एकता से ही भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा। हम सब हिंदूओं को एकजुट होने की जरूरत है।
कथावाचक पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि घर-घर वेद परंपरा का प्रसार हो, इसी उद्देश्य से वे ऑनलाइन हनुमान चालीसा हवन करा रहे हैं। हर माह होने वाले इन ऑनलाइन हवनों से लाखों लोग एक साथ जुड़कर हवन कर रहे हैं, जिससे सनातन परंपराओं का व्यापक प्रसार हो रहा है। सम्मेलन के दौरान उन्होंने परिवारिक जीवन को सुदृढ़ बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया-पूरा परिवार एक साथ बैठकर भोजन करे, एक साथ पूजा करे और आपस में बैठकर संवाद करे। इससे परिवार के सदस्य अपने सुख-दुख साझा कर पाते हैं, आपसी संकोच दूर होता है और बहन-बेटियों व बच्चों में नैतिकता का भाव विकसित होता है
