
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक कथित पत्र को इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस सेल के तीन कार्यकर्ताओं की अवैध रूप से गिरफ्तारी पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायालय ने पुलिस कमिश्नर भोपाल से पूछा है कि बिना ट्रांजिट रिमांड या कानूनी प्रक्रिया का पालन किए कार्यकर्ताओं को राजस्थान पुलिस को कैसे सौंप दिया। इसके साथ ही युगलपीठ ने पुलिस कमिश्नर भोपाल, एसएचओं साइबर क्राइम ब्रांच भोपाल, राजस्थान के ज्योतिनगर पुलिस थाने के एसएचओं सज्जन सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। युगलपीठ ने राजस्थान पुलिस को तीनों कार्यकर्ताओं को अगली सुनवाई यानी 27 अप्रैल को पेश करने के निर्देश भी दिये है। इसके साथ ही भोपालके जहांगीराबाद स्थित पुलिस परिवहन व अनुसंधान संस्थान के 20 अप्रैल 2026 के सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिये है।
दरअसल राजधानी भोपाल निवासी खिजर खान सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता एचएस छाबड़ा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि 20 अप्रैल 2026 की सुबह लगभग तीन बजे साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन भोपाल में पुलिस द्वारा कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं निखिल, बिलाल व इनाम को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था और उन्हें दो दिनों तक किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया है। वहीं शासन की ओर से दलील दी गई कि राजस्थान पुलिस की मौखिक सूचना पर तीनों को पुलिस थाने बुलाकर पूछताछ की गई और फिर उनके परिवार वालों को सौंप दिया गया। अगले दिन दोपहर को फिर सायबर सेल बुलाया और राजस्थान पुलिस को सौंप दिया गया। बताया गया कि हिरासत या उनकी गिरफ्तारी का कोई रिकार्ड या उन्हें राजस्थान पुलिस को सौंपने से संबंधित कोई दस्तावेज उन्हें नहीं भेजा गया है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पुलिस का पूरा बयान झूठा और मनगढ़ंत है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को 20 अप्रैल 2026 की तडक़े हिरासत में लिया गया था और उन्हें किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया। यहां तक कि ट्रांजिट रिमांड के लिए भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया। उक्त पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
