जनगणना हाउस लिस्टिंग का काम हुआ पूरा

सीहोर। जिले में आगामी डिजिटल जनगणना को लेकर प्रशासन ने हाउस लिस्टिंग का काम लगभग पूरा कर लिया है. अब इसी डिजिटल डेटा के आधार पर जनसंख्या गणना के साथ-साथ प्रॉपर्टी टैक्स का निर्धारण भी किया जाएगा, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन और संसाधनों के वितरण में सटीकता आएगी.

जिले में दो चरणों में प्रस्तावित डिजिटल जनगणना से पहले प्रशासन ने हाउस लिस्टिंग वेरिफिकेशन की प्रक्रिया लगभग पूर्ण कर ली है. इसके तहत जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक मकान और प्लॉट का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया है. सर्वे के दौरान मकानों की चतुर्भुज सीमाओं का निर्धारण कर उन्हें डिजिटल मैपिंग में शामिल किया गया है, जिससे जनगणना कार्य अधिक व्यवस्थित व सटीक तरीके से किया जा सकेगा.

जनसंख्या के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 13.11 लाख थी. पिछले डेढ़ दशक में हुई वृद्धि को देखते हुए अब यह आंकड़ा 16 लाख के पार पहुंचने का अनुमान है. हाल ही में किए गए सर्वे में भी जिले की संभावित जनसंख्या लगभग 16.12 लाख बताई गई है.

हाउस लिस्टिंग के दौरान सामने आया है कि जिले में आवासीय विकास की रफ्तार तेज रही है. वर्ष 2011 में करीब 2.57 लाख मकान दर्ज किए गए थे, वहीं अब संख्या बढ़कर लगभग 4.81 लाख तक पहुंच गई है. इसका मतलब है कि पिछले वर्षों में 2.23 लाख से अधिक नए घर बने हैं. औसतन हर साल करीब 14 हजार 900 नई संपत्तियां जुड़ रही हैं, जो जिले के शहरीकरण और विकास की गति को दर्शाता है. जनगणना से पहले स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) की सुविधा भी शुरू कर दी गई है, जिससे नागरिक ऑनलाइन जानकारी दर्ज कर सकते हैं. गणना कर्मी करीब 32 प्रकार की जानकारी एकत्र कर रहे हैं। इसमें घर में उपलब्ध सुविधाएं जैसे टेलीविजन, रेडियो, मोबाइल, इंटरनेट, वाहन, एलपीजी उपयोग, पेयजल स्रोत और परिवार के भोजन संबंधी जानकारी शामिल है। साथ ही मकान की संरचना—दीवार, छत और फर्श की स्थिति—से जुड़े सवाल भी पूछे जा रहे हैं.

2405 ब्लॉक , प्रत्येक में 180 से 200 संपत्ति

प्रशासन द्वारा इस पूरी प्रक्रिया को ब्लॉक स्तर पर विभाजित किया गया है. जिले में कुल 2405 ब्लॉक बनाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक ब्लॉक में औसतन 180 से 200 संपत्तियों को शामिल किया गया है. इन ब्लॉकों में सभी प्रकार के कच्चे-पक्के मकानों और खाली प्लॉट्स की नंबरिंग की गई है. गणना कर्मियों ने पहले इनका रफ नक्शा तैयार किया और बाद में उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया. इस डिजिटल डेटा के आधार पर ही जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. जिले में इसके लिए लगभग 300 प्रगणक नियुक्त किए गए हैं, जो घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे, जबकि 436 सुपरवाइजर इनकी निगरानी करेंगे. इसके अलावा 19 चार्ज अधिकारी पूरे कार्य की सत्यापन प्रक्रिया संभालेंगे और डेटा को ऑनलाइन फीड कराने की जिम्मेदारी निभाएंगे.

जमीनी स्तर पर मिल सकेंगे सटीक आंकड़े

इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि सरकार को जमीनी स्तर पर सटीक आंकड़े मिल सकेंगे. मकान गणना के जरिए यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन क्षेत्रों में पक्के मकानों, शौचालयों या अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है. इससे प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा. इसके अलावा सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं के लिए योजना बनाई जा सकेगी.

कलेक्टर ने जनगणना प्रशिक्षण का किया निरीक्षण

कलेक्टर बालागुरू के. ने जनगणना 2027 के अंतर्गत दोराहा तहसील में चल रहे चार्ज अधिकारियों एवं प्रगणकों के प्रशिक्षण का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि जनगणना का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे पूरी गंभीरता, सटीकता और पारदर्शिता के साथ संपन्न किया जाए.गंभीरता से प्रशिक्षण प्राप्त करें और ताकि जनगणना का कार्य सटीक और शुद्ध हो. स्वगणना के पश्चात प्रारंभ होने वाली मकानों की गणना में प्रगणकों द्वारा प्रत्येक मकान और परिवार की जानकारी सही तरीके से दर्ज की जाए तथा किसी भी प्रकार की त्रुटि न होने पाए.

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