
जबलपुर। प्रदेश में बंद आरटीओं के चैक पोस्ट पुन: चालू होंगे। हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने इसके लिये सरकार को तीस दिन की मोहलत दी है। दरअसल एक जनहित याचिका के निराकरण के दौरान सरकार ने अंडरटेकिंग दी थी वह ओवर लोडिंग रोकने चैक पोस्टों का संचालन जारी रखेगी, लेकिन उसके एक साल बाद सरकार ने चैक पोस्ट बंद कर दिये। जिस पर यह अवमानना याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। जिसे सुनाते हुए न्यायालय ने सरकार को तीस दिनों में चैक पोस्ट का संचालन करने के निर्देश दिये, उक्त समयावधि में आदेश का पालन न होने पर आवेदक को पुन: अवमानना मामला दायर करने की स्वतंत्रता दी है।
दरअसल यह अवमानना का मामला सतना निवासी रजनीश त्रिपाठी की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता जुबीन प्रसाद ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि वाहनों की ओवर लोडिंग और बढ़ते हादसों को लेकर वर्ष 2006 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। उक्त मामले का 3 जनवरी 2023 को निराकरण सरकार के हलफनामें पर दिये गये जवाब में हुआ था। जिसमें कहा गया था वह प्रदेश के चैक पोस्टों का संचालन जारी रखेंगे और इसके अलावा अन्य माध्यमों से भी वाहनों की ओवर लोडिंग रोकेंगे। इसके बाद प्रदेश में 30 जून 2024 से आरटीओ चेक पोस्ट बंद कर दिए थे। जिसे न्यायालय की अवमानना बताते हुए यह मामला दायर किया गया था। जिसमें आईएएस मनीष सिंह प्रमुख सचिव परिवहन विभाग व विवेक शर्मा परिवहन आयुक्त को पक्षकार बनाया गया था। हाईकोर्ट ने उक्त मामले का निराकण करते हुए सरकार को आदेश दिया कि वह पूर्व में दी गई अंडरटेकिंग का तीस दिनों में पालन करते हुए चैक पोस्ट का संचालन शुरु करे, साथ विभागीय अधिकारी वाहनों में ओवरलोडिंग की जांच हेतु अन्य तरीकों को अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा है कि यदि 30 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता तो याचिकाकर्ता अवमानना याचिका लगाकर इस याचिका को पुनर्जीवित कर सकता है।
