
गुना। न्यायालय के आदेश की अवहेलना करना जल संसाधन विभाग को भारी पड़ गया। बुधवार को न्यायालय की नजारत शाखा की टीम पुलिस बल के साथ आकाशवाणी केंद्र स्थित जल संसाधन विभाग के कार्यालय पहुंची और जब्ती (कुर्की) की कार्रवाई को अंजाम दिया। यह पूरी कार्रवाई करीब 20 साल पुराने एक मामले में कोर्ट द्वारा पारित आदेश के पालन में की गई है।
मामला करीब 20 वर्ष पूर्व का है, जब जिले के ग्राम रेंझाई में एक तालाब का निर्माण किया गया था। इस दौरान जल संसाधन विभाग ने अर्जुन सिंह रघुवंशी के खेत में अवैध रूप से नहर का निर्माण कर दिया था, जबकि सरकारी दस्तावेजों में नहर किसी अन्य व्यक्ति के खेत से निकलनी थी। पीड़ित के परिजन पीयूष रघुवंशी ने बताया कि विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर रातों-रात अर्जुन सिंह के खेत में नहर बना दी थी। इसके बाद अर्जुन सिंह ने न्याय के लिए न्यायालय की शरण ली। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने विभाग पर ढाई लाख रुपए का जुमार्ना लगाया था। विभाग द्वारा जुमार्ने की राशि जमा न करने पर पीड़ित ने पुन: न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
साल 2022 में न्यायाधीश आयुषी मित्तल ने इस मामले में डिक्री आदेश पारित किया था। बार-बार वारंट जारी होने और विभाग द्वारा समय मांगे जाने के बावजूद जब 1 लाख 470 रुपए की वसूली नहीं हुई, तो कोर्ट ने कुर्की के कड़े आदेश दिए। बुधवार को जिला नाजिर राजेश शर्मा के नेतृत्व में कोर्ट की टीम विभाग पहुंची। टीम ने कार्यालय से टेबल, कुर्सी और अन्य कीमती सामान अपने कब्जे में ले लिया, जिनसे नीलामी के जरिए वसूली की जा सके। हालांकि, जब्त किए गए सामान का सही मूल्य निर्धारण न्यायालय में ही किया जाएगा।
गौरतलब है कि प्रधान न्यायाधीश द्वारा पिछले एक साल से कुर्की और कब्जा दिलाने को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में जल संसाधन विभाग के विरुद्ध यह बड़ी कार्रवाई की गई है। विभाग की इस लापरवाही ने न केवल शासन की छवि खराब की है, बल्कि कर्मचारियों को भी कोर्ट की इस कार्रवाई के दौरान असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
