कोलकाता | पश्चिम बंगाल के हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्र नंदीग्राम में 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से ठीक पहले चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मंगलवार को एक नया आदेश जारी करते हुए नंदीग्राम के पुलिस ऑब्जर्वर हितेश चौधरी को हटाकर उनकी जगह अखिलेश सिंह को नियुक्त करने की घोषणा की। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। हालांकि आयोग ने इस फेरबदल के पीछे का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि नंदीग्राम की अत्यधिक संवेदनशीलता और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह रणनीतिक निर्णय लिया गया है।
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र राज्य की सबसे हॉट सीट मानी जा रही है, जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला है। चुनाव आयोग का यह कदम तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा पुलिस प्रशासन के खिलाफ की गई शिकायतों के बाद आया है। सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर भाजपा नेताओं के प्रति नरम रुख अपनाने और टीएमसी कार्यकर्ताओं को परेशान करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। नंदीग्राम से टीएमसी के उम्मीदवार पवित्र, जो कभी सुवेंदु अधिकारी के करीबी रहे हैं, ने भी क्षेत्र में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रशासनिक बदलावों की मांग की थी।
चुनाव आयोग के इस फैसले का उद्देश्य नंदीग्राम में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है। नंदीग्राम में पहले भी चुनावी हिंसा के मामले सामने आ चुके हैं, जिसे देखते हुए नए पुलिस ऑब्जर्वर अखिलेश सिंह को विशेष निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, न केवल नंदीग्राम बल्कि आसपास के इलाकों में भी अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की जा रही है। सुवेंदु अधिकारी जहाँ नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनावी मैदान में हैं, वहीं ममता बनर्जी दूसरे चरण में 29 अप्रैल को भवानीपुर में वोटिंग का सामना करेंगी। फिलहाल, नंदीग्राम में भारी सुरक्षा घेरे के बीच चुनावी मशीनरी मतदान की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है।

