सतना :जिले के चित्रकूट क्षेत्र का तराई अंचल कुपोषण का दंया झेलने के लिए दशकों से अभिशप्त बना हुआ है. भले ही केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा व्यवस्था में सुधार करने के तमाम दावे किए जाएं. लेकिन अंतिम पंक्ति में खड़े तराई क्षेत्र के आदिवासियों तक कितनी राहत पहुंच पाती है, इसकी तस्दीक आंकड़ों के जरिए की जा सकती है. अभी पखवाड़े भर पहले ही 11 माह की बालिका की मौत की वजह को दबी ज़बान से कुपोषण बताया जा रहा था. वहीं अब 4 माह के जुड़वा बच्चों की कुपोषण के चलते हालत गंभीर हो जाने की घटना सामने आ गई.प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के चित्रकूट क्षेत्र के मझगवां विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम सुरंगी पथरा में कुपोषण का नया मामला सामने आने से एक बार फिर हडक़ंप मच गया.
गांव के निवासी नत्थू प्रसाद प्रजापति के जुड़वां बच्चे हैं. 4 माह के नैतिक और प्रांसी की तबियत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी. जिसके चलते दोनों का उपचार गांव के ही एक झोला छाप चिकित्सक से कराया जा रहा था. लेकिन उक्त उपचार के बावजूद दोनों बच्वों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. जिसके चलते उन्हें उपचार के लिए मझगवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. लेकिन दोनों बच्चों की हालत इतनी गंभीर नजर आने लगी कि वहां पर उपचार करने के बाद उन्हें जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया. जिसके चलते मंगलवार को दोनों बच्चों को जिला चिकित्सालय में बच्चों के आईसीयू वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरु कर दिया गया.
चिकित्सालय में उपचाररत दोनों बच्चों की हालत को देखकर स्पष्ट नजर आ रहा है कि दोनों गंभीर तौर पर कुपोषित हैं. दोनों बच्चों का जन्म 20 दिसंबर को हुआ था और अब 4 महीने पूरे हो जाने के बावजूद भी नैतिक का वजह जहां 2 किलो 953 ग्राम है. वहीं प्रांसी का वजन 2 किलो 862 ग्राम है. न सिर्फ दोनों बच्चों के हाथ-पैर बुरी तरह सिकुड़े हुए हैं, बल्कि शरीर के नाम पर हड्डियों का ढांचा ही दिखाई दे रहा है. उपचार कर रहे शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव प्रजापति के अनुसार दोनों बच्चें के स्वास्थ्य की बारीकी से निगरानी की जा रही है. गौरतलब है कि पखवाड़े भर पहले ही मझगवां क्षेत्र अंतर्गत मतहैन ग्राम पंचायत के कैमहा गांव के निवासी राजललन की 11 माह 20 दिन की बेटी की मौत हो गई थी. हलांकि उक्त बालिका को देखकर सभी उसे गंभीर कुपोषित बता रहे थे. लेकिन गांव में हुए पंचनामे से लेकर शासकीय निरीक्षण में कुपोषण को मौत का कारण नहीं माना गया था.
डरावने आंकड़े
जिले के चित्रकूट क्षेत्र अंतर्गत मझगवां के तराई अंचल में कुपोषण के आंकड़े डराने वाले हैं. आंकड़ों के अनुसार मौजूदा समय में इस क्षेत्र में 1300 से अधिक बच्चे कुपोषण की श्रेणी में आते हैं. जिसमें से 840 बच्चे माइल्ड यानी अपेक्षाकृत कम स्तर के कुपोषित हैं जबकि 460 बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में रखे गए हैं. मामले का काबिलेगौर पहलू यह भी है कि मैदानी स्तर पर हुए सर्वे में कुपोषित बच्चों को ङ्क्षचहित किए जाने के बावजूद भी महिला बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार उक्त बच्चों को कुपोषण के दंश से बाहर निकाल पाने में अक्षम नजर आ रहे हैं. संभवत: इसी वजह से शासन द्वारा करोड़ों रु खर्च कर बनाए गए एनआरसी केंद्र खाली पड़े नजर आते हैं.
