सिर पर मटके और आंखों में आंसू, सीहोर की महिलाओं ने कलेक्ट्रेट में बजाया खाली बर्तन का बिगुल

सीहोर। जिले में बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि ग्रामीण महिलाएं खाली बर्तन लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं. महिलाओं द्वारा कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन और गांवों में विरोध की गूंज ने प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही जिले के ग्रामीण अंचलों में पानी की किल्लत गहराती जा रही है. मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जब करीब 12 गांवों की महिलाएं सिर पर खाली बर्तन रखकर पैदल मार्च करते हुए अपनी पीड़ा सुनाने पहुंचीं. महिलाओं का यह प्रदर्शन न केवल पानी की कमी, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ भी एक बड़ा संदेश बनकर सामने आया. कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले ही चिलचिलाती धूप और प्यास से बेहाल एक महिला अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी. मौके पर मौजूद अन्य महिलाओं और लोगों ने तत्काल उसे संभाला. यह घटना जल संकट की भयावह स्थिति को उजागर करने के लिए काफी थी.

जल संकट का असर अब ग्रामीण जीवन पर साफ नजर आने लगा है. कई परिवार गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं. कुछ लोग खेतों में अस्थायी रूप से रह रहे हैं. जहां पानी की व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर है. महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगी. अब भोपाल में मंत्री और मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की बात भी कही गई है.

दो किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाने की लाचारी

महिलाओं ने बताया कि कई हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं और नलकूप जवाब दे चुके हैं। ऐसे में पानी के लिए लंबी कतारें लगाना और खाली बर्तन बजाकर विरोध करना मजबूरी बन गया है. प्रदर्शनकारी महिलाओं ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए तीन प्रमुख मांगें रखीं गांवों में नए बोरवेल खनन, नियमित जलापूर्ति और स्थायी जल योजनाओं को शीघ्र लागू करना. उनका कहना है कि लगातार गिरते जलस्तर के कारण पुराने कुएं और हैंडपंप सूख चुके हैं, जिससे पेयजल की समस्या विकराल हो गई है. ग्राम पंचायत रोला, आलमपुरा, पचामा सहित कई गांवों में पानी की समस्या चरम पर है. महिलाओं को प्रतिदिन 1 से 2 किलोमीटर दूर जाकर झिरियां खोदकर या खेतों के कुओं से पानी लाना पड़ रहा है. सुबह से शाम तक पानी की जुगाड़ में लगे रहने के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है.

इधर टंकी से बह रहा हजारों लीटर पानी

भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही नगर में जलसंकट गहराने लगा है. एक तरफ शहरवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नपा की लापरवाही के कारण हजारों लीटर कीमती पानी सड़कों पर बह रहा है. ताजा मामला शहर की मुरली वाली टंकी का है, जो आज फिर ओवरफ्लो हो गई. रहवासियों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि पिछले 7 दिनों में यह तीसरी बार है जब यह टंकी ओवरफ्लो हुई है. टंकी भरने के बाद मोटर बंद न होने के कारण पानी घंटों तक सड़कों पर बहता रहा. पानी की बर्बादी का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी शहर के अन्य हिस्सों में लापरवाही सामने आ चुकी है नगर में वर्तमान में जल प्रदाय की स्थिति बेहद खराब है. नगर पालिका यहां हर दो दिन छोड़कर यानी तीसरे दिन पानी की सप्लाई करती है. ऐसे में जहां एक-एक बाल्टी पानी की कीमत है, वहां टंकियों का इस तरह ओवरफ्लो होना प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े करता है.

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