इस्लामाबाद | पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके कूटनीतिक दबाव के कारण अमेरिका को वह नक्शा हटाना पड़ा, जिसमें पूरे जम्मू-कश्मीर और पीओके (PoK) को भारत के अभिन्न अंग के रूप में दिखाया गया था। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) द्वारा साझा किए गए इस मानचित्र को लेकर उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों से कड़ा संपर्क साधा था। पाकिस्तान का तर्क है कि अमेरिका ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उस “गैर-कानूनी” मैप को संशोधित कर दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी कार्यालय ने भारत के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते की घोषणा करते हुए अक्साई चिन और पीओके सहित भारत का पूर्ण नक्शा पोस्ट किया था।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि अमेरिका ने मानचित्र को संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकृत मानदंडों के अनुरूप बदल दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि जम्मू-कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और इसका समाधान सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के माध्यम से ही होना चाहिए। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद और वॉशिंगटन दोनों स्तरों पर इस मैप को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। पाकिस्तान इस सुधार को अपनी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहा है और अमेरिका द्वारा इसे विवादित क्षेत्र मानने पर जोर दे रहा है।
यद्यपि अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर इस मानचित्र को हटाने के कारणों पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन भारत इस मामले में हमेशा स्पष्ट रहा है कि उसे अपनी क्षेत्रीय अखंडता के लिए किसी बाहरी देश के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि USTR द्वारा पहले साझा किया गया नक्शा भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों का संकेत था। हालांकि, पाकिस्तान की आपत्ति के बाद मैप का हटाया जाना दक्षिण एशिया की जटिल कूटनीति को दर्शाता है। फिलहाल भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस विशिष्ट घटना पर कोई नई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन भारत पूरे जम्मू-कश्मीर को अपना अटूट हिस्सा मानता है।

