
महू। क्षेत्र की जीवनदायिनी गंभीर नदी के अस्तित्व पर मंडरा रहे प्रदूषण के खतरे को देखते हुए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (क्षेत्रीय कार्यालय, इंदौर) ने कड़ा रुख अपनाया है। पूर्व मंडल अध्यक्ष जयेश यादव द्वारा की गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए बोर्ड ने नगर परिषद महूगांव को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
निरीक्षण में खुली पोल: घाटों पर फैला मिला कचरा
शिकायत के बाद प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा 31 दिसंबर 2025 को गंभीर नदी के विभिन्न घाटों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान बोर्ड के अधिकारियों ने पाया कि गौशाला घाट पर सॉलिड वेस्ट (ठोस अपशिष्ट) यत्र-तत्र बिखरा हुआ है और चारों ओर गंदगी व्याप्त है। निरीक्षण रिपोर्ट में नदी में नगर पालिका के नालों, गटर और सीवेज के अनुपचारित पानी को सीधे छोड़े जाने की पुष्टि हुई है। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सतीश कुमार चौकसे ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर परिषद महूगांव को पत्र जारी कर निम्नलिखित निर्देश दिए हैं।
घाटों की सफाई गंभीर नदी स्थित सभी घाटों की तुरंत साफ-सफाई कराई जाए। प्रदूषण पर रोक लगाई जाए। नदी के संरक्षण हेतु आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। जल उपचार संयंत्र महूगांव का घरेलू दूषित जल नदी में न मिले, इसके लिए जल्द से जल्द दूषित जल उपचार संयंत्र की स्थापना सुनिश्चित की जाए।
यह है शिकायतकर्ता का पक्ष
इस मामले में शिकायतकर्ता जयेश यादव ने बताया कि लंबे समय से गंभीर नदी में सीवेज और कचरा फेंका जा रहा था, जिससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति न करे, बल्कि धरातल पर गंभीर नदी घाट की सफाई व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू करे ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए नदी को बचाया जा सके। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में उचित कदम नहीं उठाए गए, तो नियमानुसार सख्त कार्यवाही की जाएगी।
