नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (वार्ता) इराक में फंसे 12 भारतीय नाविक इराक के हवाई क्षेत्र के खुलने के बाद सोमवार को मुंबई पहुंचे। पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों से उत्पन्न नियमित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में मंगलवार को यह जानकारी दी गयी।
अधिकारियों ने बताया कि बगदाद स्थित भारतीय दूतावास ने उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की और भारत लौटने में उनकी मदद की। इराक का हवाई क्षेत्र सीमित उड़ान संचालन के साथ क्षेत्र के गंतव्यों के लिए खुला है, जिसका उपयोग भारत की आगे की यात्रा के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मालवाहक और चार्टर्ड उड़ानों के लिए ईरानी हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास आर्मेनिया और अज़रबैजान के रास्ते भारत जाने वाले भारतीय नागरिकों की आवाजाही में सहायता प्रदान करना जारी रखे हुए है।
इजरायल का हवाई क्षेत्र खुला है और क्षेत्र के गंतव्यों के लिए सीमित उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं, जिनका उपयोग भारत की आगे की यात्रा के लिए किया जा सकता है। जॉर्डन और मिस्र के रास्ते इजरायल से भारतीय नागरिकों की वापसी को सुगम बनाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि ईरान युद्ध के बाद देश के बंदरगाहों पर जहाजों की जो भीड़ भाड़ शुरू हो गयी थी वह धीरे धीरे छंट गयी है। बंदरगाहों पर परिचालन सामान्य बना हुआ है और कहीं भी भीड़ भाड़ की सूचना नहीं है तथा माल ढुलाई में उल्लेखनीय सुधार हुआ है ।
पश्चिमी भारत के प्रमुख बंदरगाहों से लगभग 97 प्रतिशत कंटेनरों की निकासी हो चुकी है। लड़ाई के तेज होने पर बंदरगाहों के माल के अहाते लगभग 80 प्रतिशत तक भर गये थे औसत यार्ड ऑक्यूपेंसी अब घटकर लगभग 60 प्रतिशत हो गई है, जो बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर दबाव कम होने का संकेत देती है।
अधिकारियों ने बताया कि 28 फरवरी से अब तक कुल नौ एलपीजी पोत और एक कच्चे तेल का पोत होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर चुका है जो इस क्षेत्र में समुद्री आवागमन के धीरे-धीरे स्थिर होने को दर्शाता है।
