थोक और खेरची व्यापारी हैं चिंतित
इंदौर: कुछ वर्षों से व्यापार में मंदी का दौर ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है जिसका बुरा असर हर वर्ग पर रहा है. जीएसटी के बाद अब विदेशी टेरिफ से व्यापार की स्थिति और भी गिरती जा रही है. केंद्र और राज्य सरकारों को चिंतन कर जल्द ही विकल्प निकालना होगा.त्यौहारों पर थोक एवं खेरची व्यापारियों को फुरसत नहीं मिल पाती थी. शहर के आसपास के गांव और दूर दराज़ के छोटे बड़े शहरों से भी व्यापारी खरीद फरोख्त करने शहर के बाज़ारों में पहुचते हैं. हाल ही में देश में राखी का त्योहार निकला है. इस त्यौहार महंगाई ने बहनों का प्यार फीका कर दिया.
व्यापार के आंकड़े जानने के लिए जब अलग-अलग व्यापारियों से बात की गई तो स्थिति ही कुछ उल्टी दिखाई दी. राखी पर व्यापार में साठ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. पिछले कुछ वर्षों से व्यापार में बड़ी मंदी चलती आ रही थी. कोरानी माहामारी के बाद कई उद्योग बर्बाद हुए और बेरोज़गार लोगों की तंगी चरम पर पहुच गई. जैसे-तैसे व्यापारियों ने अपने आप को संभाला लेकिन बढ़ते जीएसटी से वस्तुओं की कीमतों से महंगाई आसमान पर पहुंच गई. इसका असर शहर और गांव में भी देखने को मिल रहा है. थोक दुकानों पर ग्राहक नहीं है. खेरची व्यापारी छुट पुट सामान बेच कर खर्चे निकाल रहे हैं.
इनका कहना है
विदेश वस्तु सस्ती, स्वदेशी महंगी यह गलत है. गांव का किसान और छोटा दुकानदार शरह का व्यापारी सब परेशान हैं. बढ़ते जीएसटी से मंहगाई बढ़ेगी. मज़दूर वर्ग पिसा रहा है. जीएसटी 18 से घट कर पांच प्रतिशत हो.
– अली भाई बेगवाला, व्यापारी
पांच वर्षों से व्यापार में मंदी चल रही है. इस बार तो खाली बैठे हैं. गांव के हाट बाज़ार से आने वाले व्यापारियों में बड़ी कमी देखी गई है. व्यापारी परेशान हैं. खर्चे निकालना मुश्किल हो रहा है.
– मोहम्मद रफीक, कपड़ा व्यापारी
पिछले वर्ष फिर भी ठीक रहा, लेकिन इस बार तो बहुत ही मंदी रही, जिसके चलते साठ प्रतिशत माल स्टॉक हो गया. ऐसे दौर कभी नहीं देखा गया. सरकार को अपनी पॉलिसी को जीएसटी कंट्रोल करना चाहिए.
– संजय कुमार, राखी व्यापारी
