प्रताप करोसिया की विदाई के मायने

मालवा- निमाड़ की डायरी संजय व्यास। अंतत: मप्र राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष और दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री प्रताप करोसिया की विदाई हो गई. इंदौर के भाजपा नेता प्रताप करोसिया को आयोग अध्यक्ष पद से यूं तो अचानक हटाया गया है, पर पर्दे के पीछे कहानी कुछ ओर है. उन्हें पदच्यूत करने की पटकथा उस समय से चल रही थी, जब पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन के बेटे के शोरूम पर प्रताप करोसिया के भतीजे ने तोडफ़ोड़ की थी. पुलिस प्रकरण के बाद गहराए विवाद में करोसिया की शह पर उनके भतीजे ने सुमित्रा महाजन के साथ केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को मामले में आड़े हाथ लिया था और उन पर गंभीर आरोप लगाए थे. उनके अनुसार 6 दिसंबर को उन पर विविध धाराओं में केस दर्ज हुआ था. फिर उक्त नेताओं के दखल के बाद इसमें 9 दिसंबर को गैर जमानती धाराएं बढ़ीं और इन्हें गिरफ्तार कर कान पकडक़र माफी मंगवाई गई और जुलूस निकाला. तब से विजयवर्गीय प्रताप करोसिया से खफा चल रहे थे और उनकीें सफाई कर्मचारी आयोग से रवानगी के लिए पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाए हुए थे. किन्हीं कारणों से एक्शन टलता जा रहा था और उनके 3 साल की कार्यावधि का इंतजार किया गया. आखिर नई राजनीतिक नियुक्तियों की कवायद शुरू होने के साथ प्रताप करोसिया को

सफाई कर्मचारी आयोग के पद से मुक्त कर दिया गया.

पद पर काबिज रहने करोसिया अड़े

राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष और दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री प्रताप करोसिया को पद से हटाने का फरमान जारी होते ही करोसिया समर्थकों में हडक़ंप मच गया है. अब यह मामला महज एक सामान्य विदाई नहीं बल्कि एक हाई-प्रोफाइल विवाद बन गया है. करोसिया ने इस आदेश को खुद के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र करार देते हुए सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस पत्र को करोसिया ने चुनौती दी कि नियुक्ति का आदेश सरकार या मंत्रालय से हुआ है. इस बार एक विभाग की ओर से सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया. वह भी ऐसे अधिकारी ने, जिन्हें इसका अधिकार ही नहीं है. आलम यह है कि एक तरफ विभाग ने उनकी सुविधाएं छीनने का आदेश दिया है, तो दूसरी तरफ करोसिया स्टे लेकर अपनी कुर्सी पर कब्जा बनाए रखने की जुगत में लगे हैं.

अब भारत आदिवासी पार्टी की निकायों पर नजर

2023 के विधान सभा चुनाव में रतलाम जिले की सैलाना सीट जीतकर मप्र में खाता खोलने वाली भारत आदिवासी पार्टी की नजर अब नगर निकाय चुनावों पर है. 2027 में होने वाले इन चुनावों में अपना दबदबा वनाने के लिए विधायक कमलेश्वर डोडियार को रतलाम और आसपास के क्षेत्रों की जिम्मेवारी पार्टी ने सौंप दी है. डोडियार इन दिनों गांव-गांव पार्टी विस्तार व सुदृढ़ता के लिए विभिन्न इकाइयों के गठन पर जोर दे रहे हैं. भीषण गरमी में भी घर बैठने के बजाए वे ग्राम-फलियों में चक्कर लगाते नजर आते हैं. साल भर बाद होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर भारत आदिवासी पार्टी जिले में कार्यकर्ताओं को जोड़ पार्टी विस्तार कर रही है. डोडियार हाल ही में बाजना, सरवन, सैलाना और शिवगढ़ में ब्लॉक कार्यकारिणियों का गठन कर चुके हंै और जिले के पिपलोदा, रतलाम ग्रामीण और जावरा में भी पार्टी इकाइयां गठित करने की तैयारियों में लगे है. आदिवासी बहुल इस इलाके में अधिक से अधिक निकायों पर फतह की पार्टी की मंशा है.

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