न्यूयॉर्क, 21 अप्रैल (वार्ता) उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने मंगलवार को कहा कि वह परमाणु गठबंधन बना रहेगा और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करता रहेगा। नाटो ने अपने बयान में कहा कि वर्तमान “बिगड़ता सुरक्षा माहौल” एनपीटी के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहा है, क्योंकि परमाणु प्रसार से जुड़े संकट लगातार बढ़ रहे हैं। गठबंधन देशों ने एनपीटी के पूर्ण कार्यान्वयन के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई। 1970 में लागू होने के बाद से यह संधि वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण रही है और इसे वैश्विक अप्रसार तथा निरस्त्रीकरण ढांचे की आधारशिला माना जाता है। बयान में कहा गया, “जब तक परमाणु हथियार मौजूद हैं, नाटो एक परमाणु गठबंधन बना रहेगा। इसकी परमाणु क्षमता का मूल उद्देश्य शांति बनाए रखना, दबाव को रोकना और आक्रमण को निरुत्साहित करना है।”
नाटो ने परमाणु हथियार नियंत्रण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए पारदर्शिता बढ़ाने और जोखिम कम करने पर जोर दिया। उसने वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों के सत्यापन योग्य उन्मूलन के लक्ष्य के समर्थन की बात भी कही, बशर्ते सभी देशों की सुरक्षा प्रभावित न हो। गठबंधन देशों ने यह भी कहा कि परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को अवैध ठहराने के प्रयासों को वे अस्वीकार करते हैं और परमाणु हथियार निषेध संधि उनके कानूनी दायित्वों को प्रभावित नहीं करती।
हाल के वर्षों में रूस ने नाटो की गतिविधियों और पश्चिमी सीमाओं के पास सैनिक जमावड़े पर चिंता जताई है, जबकि क्रेमलिन का कहना है कि वह किसी के लिए खतरा पैदा नहीं करता है , लेकिन अपने हितों के खिलाफ किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं करेगा।

