
इंदौर। जिले में कुपोषण के आंकड़ों में कमी जरूर आई है, लेकिन समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है. इस साल 984 बच्चे गंभीर कुपोषण (सेम) श्रेणी में चिन्हित हुए हैं, जो पिछले पांच सालों में सबसे कम है. इसके बावजूद 6267 बच्चे अब भी मध्यम कुपोषण से जूझ रहे हैं, जिससे स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है.
महिला एवं बाल विकास विभाग सूत्रों के अनुसार पिछले वर्षों में गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या लगातार हजार के आसपास रही है. वर्ष 2021 और 22 में 1428, 2022 और 23 में 1334, 2023 और 24 में 1047, 2024 और 25 में 1184 जबकि 2025 और 26 में 984 बच्चे इस श्रेणी में दर्ज किए हैं. विभाग द्वारा आंगनवाड़ी स्तर पर पोषण अभियान, बगिया योजना और अन्य प्रयासों से कुछ हद तक सुधार जरूर हुआ है, लेकिन अपेक्षित परिणाम अब भी नहीं मिल पाए हैं.
इंदौर जैसे विकसित शहर में, जहां बड़े मॉल और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं, वहां सैकड़ों बच्चों का गंभीर कुपोषण में होना सवाल खड़े करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यम कुपोषण से ग्रसित 6267 बच्चों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो इनमें से कई बच्चे गंभीर श्रेणी में पहुंच सकते हैं. ऐसे बच्चों में वजन कम होना, लंबाई का विकास रुकना, कमजोरी, बार बार बीमार पड़ना और भूख कम लगना जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं. विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पूरक आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और वजन की निगरानी की जा रही है. जरूरत पड़ने पर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों और अस्पतालों में भी भर्ती किया जा रहा है. इसके बावजूद सवाल बना हुआ है कि योजनाओं और संसाधनों के बाद भी कुपोषण पूरी तरह काबू में क्यों नहीं आ पा रहा.
यह हैं प्रमुख आंकड़े…
गंभीर कुपोषित (2025-26): 984
मध्यम कुपोषित: 6267
2021-22: 1428
2022-23: 1334
2023-24: 1047
2024-25: 1184
