नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में गठित एक अपीलीय न्यायाधिकरण से उस याचिकाकर्ता की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करने का अनुरोध किया है, जिसे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ के बाद मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ता के पास पासपोर्ट है, वह 2002 की मतदाता सूची का हिस्सा था और तब से लगातार मतदान कर रहा है।
अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल सुनवाई में प्राथमिकता की सीमित राहत चाहता है, क्योंकि मतदाता सूची 27 अप्रैल को बंद हो जाएगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने तीन अप्रैल को न्यायाधिकरण से इस मामले में गुहार लगायी थी लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई है।
इससे पहले इसी महीने, न्यायालय ने एक अन्य वादी को भी इसी तरह की राहत के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था, जिसने प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की थी।