छत्तीसगढ़ बॉयलर हादसे में अनिल अग्रवाल के प्रति समर्थन बढ़ा

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (वार्ता) छत्तीसगढ़ बॉयलर हादसे में वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल का नाम प्राथमिकी में शामिल किये जाने पर सवाल उठाते हुए उद्योग जगत से भीतर और बाहर से कुछ और लोगों ने उनके प्रति समर्थन व्यक्त किया है। जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने शुरुआत में ही कहा था कि जांच से पहले समूह के अध्यक्ष का नाम प्राथमिकी में शामिल करना गलत है, क्योंकि वह सीधे तौर पर प्लांट के संचालन के लिए जिम्मेदार नहीं थे। उन्होंने कहा था कि जब किसी सार्वजनिक कंपनी के संयंत्र में या रेलवे में हादसे होते हैं, उसके अध्यक्ष का नाम प्राथमिकी में नहीं होता है। निजी क्षेत्र के लिए भी यही मानक होना चाहिए। पूर्व उपराज्यपाल और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी किरण बेदी ने कहा कि हाल ही में उन्होंने वेदांता के संयंत्रों का दौरा किया था और देखा था कि वहां सुरक्षा के उच्च मानकों का पालन किया जाता है। उन्होंने वेदांता को ‘राष्ट्रीय संपत्ति’ बताते हुए अपने दृष्टिकोण में बेहद सावधान रहने की आवश्यकता पर बल दिया। पद्मश्री और एरिन कैपिटल के चेयरमैन मोहनदास पाई ने कहा कि जिस व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना उद्योग में डर पैदा करने वाला है।

कॉर्पोरेट और कानूनी सलाहकार अक्षत खेतान ने इसे निवेशकों के विश्वास पर सीधा हमला करार देते हुए डराने की रणनीति बताया। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या हम यह संदेश दे रहे हैं कि उद्योगपतियों को मनमाने ढंग से निशाना बनाया जायेगा? केडिया सिक्योरिटीज के संस्थापक और बाजार विशेषज्ञ विजय केडिया ने कहा, “अगर फैक्ट्री हादसे में प्रवर्तक पर प्राथमिकी होती है, तो ट्रेन हादसे में रेल मंत्री पर भी होनी चाहिये, जवाबदेही समान होनी चाहिये, चयनात्मक नहीं।”
स्टेग एनर्जी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड के तकनीकी निदेशक कोटा भानु प्रकाश ने जांच के बाद जवाबदेही तय करने की सलाह दी, न कि अटकलों के आधार पर।
वरिष्ठ पत्रकार और गोन्यूज के संस्थापक पंकज पचौरी ने रेल दुर्घटनाओं से लेकर वित्तीय घोटालों तक, समान परिस्थितियों में शीर्ष अधिकारियों का नाम नहीं लिया जाता और श्री जिंदल द्वारा उठाया गया मुद्दा उचित और आवश्यक है।

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