​भोपाल मेट्रोपॉलिटन में राजगढ़ जिला मुख्यालय ही उपेक्षित: खिलचीपुर और जीरापुर को बाहर रखा जा रहा

गौरव चौरसिया राजगढ़। राजधानी भोपाल का मेट्रोपोलिटन एरिया बनाया जा रहा है और उसमें आसपास के 6 जिलों को शामिल किया जा रहा है. इनमें राजगढ़ जिले का नाम भी शामिल है. लेकिन जिले का केवल आधा भाग ही मेट्रोपोलिंटन रीजन यानी प्रादेशिक राजधानी क्षेत्र में शामिल किया जा रहा है. इसका औपचारिक गजट प्रकाशन 17 अप्रैल को किया जा चुका है. जिसे बीते 6 अप्रैल को अंतिम रूप दिया गया था. जिले के कुरावर, नरसिंहगढ़, व्याबरा, पचोर, खुजनेर, सुठालिया और सारंगपुर को इसमें शामिल किया जा रहा है. लेकिन जिला मुख्यालय राजगढ़, खिलचीपुर, माचलपुर, भोजपुर और जीरापुर अंचलों को छोड़ दिया गया है.

भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन का मतलब सिर्फ भोपाल शहर नहीं है, बल्कि भोपाल और उसके आसपास के बड़े क्षेत्र को मिलाकर बनाया जाने वाला एक महानगरीय विकास क्षेत्र है. इसे मेगा अरबन रीजन के रूप में विकसित करने की योजना है.

रायसेन, नर्मदापुरम, राजगढ़, सीहोर और विदिशा तक होगा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र

भोपाल राजधानी क्षेत्र को विस्तृत करने के लिए 2031 की मास्टर प्लानः 12098 वर्ग किलो मीटर में होगा वृहत्तर भोपाल परिक्षेत्र

ये क्षेत्र हुआ शामिल

6 जिलों के 2510 गांव, कस्बे, शहरों को किया शामिल

जिले के नरसिंहगढ़, कुरावर, खुजनेर, ब्यावरा, पचार होंगे शामिल

ये क्षेत्र छोड़ दिया गया

भोपाल मेट्रोपोलिटन में आधे जिले को शामिल किया

बहुप्रतीक्षित भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के गठन में राजगढ़ जिले को आंशिक तौर पर शामिल किया गया है. योजना के तहत जिले के गांवों को मेट्रोपोलिटन रीजन में शामिल किया गया है, लेकिन जिले के सबसे महत्वपूर्ण और विकास की दृष्टि से पिछड़े माने जाने वाले क्षेत्र राजगढ़ खिलचीपुर और जीरापुर को इससे बाहर रख दिया गया है. इस निर्णय ने न केवल क्षेत्रीय असंतुलन की आशंका को जन्म दिया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी भी पैदा कर दी है. जानकारों के मुताबिक मेट्रोपोलिटन योजना का उद्देस्य शहरी और आसपास के क्षेत्रों का समय एवं संतुलित विकास करना है, ताकि आधारभूत संरचना परिवहन निवेश और तेजी लाई जा सके. ऐसे में जिले के प्रमुख प्रशासनिक केंद्र राजगढ़ और अतिपिछड़े इलाकों को बाहर रखना समझ से परे है जिन क्षेत्रों को सबसे अधिक विकास की आवस्यकता है, उन्हें ही योजना से वंचित कर दिया गया जबकि अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति वाले हिस्सों को इसमें शामिल किया गया है. इस फैसले से यह आशंका भी जताई जा रही है कि आने वाले समय में विकासका लाभ केवल बयनित क्षेत्रों तक सीमित रह जाएगा, जिससे जिले के भीतर असमानता और अधिक बढ़ सकती है. जिला मुख्यालय और प्रमुख तहसीलों के बाहर रहने से प्रशासनिक समय और योजनाओं के क्रियापरी असर पड़ने की संभावना है

6 जिलों के 2510 गांव और कस्बे शामिल किए

इस नई योजना के तहत भोपाल के आसपास नर्मदापुरम रायसेन सीहोर, विदिशा और राजगढ़ जिले को मिलाकर वृहद मेट्रोपोलिटन क्षेत्र बनाया गया है. एक तरह से ये 6 जिले और इनके करीब 2510 गांव इसके मेट्रोपॉलिटन की परिसीमा का हिस्सा कहलाने भौगोलिक और प्रशासनिक रूप से यह भोपाल मेट्रोपोलिटन यानी राजधानी क्षेत्रका हिस्सा माने जाएंगे वहीं जिले के करीब 698 गांवों को इसमें शामिल किया जा खा है. राजगढ़ जिला मुख्यालय को तो इसमें शामिल नहीं किया गया है लेकिन ब्यावरा से राजगढ़ जाने वाले मार्ग के दोनों ओर के करीब 40-50 इसमें शामिल किये गये है इसका लाभब्यावरा को सर्वाधिक रूप से मिलने की उम्मीद है क्योंकि केदारों दिशाओं में निकले हाईचे मुख्य माग से जुड़े गांवों को इसमें शामिल किया गया है

आर्थिक और ढांचागत अंतर

मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र जैसे ब नरसिंहगढ़ जो भोपाल के करीब है उनको भारी निवेश बेहतर सड़कें और आधुनिक परिवहन सुविधार मिलेगी बड़ी कंपनियां और उद्योग अक्सर मेट्रोपोलिटन सीमा के भीतर रहना पसंद करते हैं ताकि उन्हें टैक्स छूट और बेहतर कनेक्टिविटी मिले इससे राजगढ़ मुख्यालय और जीरापुर खिलीपुर में औद्योगिक विकासको गति धीमी रह सकती है जीरापुर और खिलीपुर जैसे पिछड़े क्षेत और चमिक वर्ग रोजगार की में तेजी से भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को ओर पलायन कर सकते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और कमजोर हो सकती है

छूट जाने का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

अगर विकास का पूरा ध्यान केवल भोपाल के नजदीकी पर रहेगा तो जिले के भीतर ही दो भाग बन जाएंगे एक हिस्सा जी विकसित और आधुनिक दूसरा हिस्सा जो पिछड़ा और उपेक्षित महसूस करेगा जो कि खितपूर, जौरापुर और मावलपुर सहित सीमांत क्षेत्र है इससे सामाजिक-आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है और राजगढ़ से जिला मुख्यालय ही छूट जायेगा.

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