कोझिकोड, (वार्ता) केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और विपक्ष के नेता वीडी सतीशन के बीच भारतीय जनता पार्टी-आरएसएस परिवार के संबंधों को लेकर चल रही जुबानी जंग गुरुवार को और तेज हो गयी जब श्री विजयन ने आरएसएस के कार्यक्रम में श्री सतीशन की भागीदारी पर सवाल उठाया।
यह जंग मुख्य रूप से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा(एलडीएफ) और भाजपा-आरएसएस के बीच किसी गुप्त गठजोड़ या सौदे के आरोपों पर केंद्रित रही। श्री विजयन ने आज 2006 की एक तस्वीर साझा की, जिसमें श्री सतीशन अपने परवूर निर्वाचन क्षेत्र में गुरुजी गोलवलकर की जन्म शताब्दी समारोह का उद्घाटन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने इस तस्वीर के साथ ही इस सौदे के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है।
मुख्यमंत्री ने अपने फेसबुक पेज पर आरएसएस के कार्यक्रम में श्री सतीशन की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि धर्मनिरपेक्ष केरल की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि 2006 में अपने परवूर निर्वाचन क्षेत्र में माधव सदाशिव गोलवलकर शताब्दी समारोह में अपनी भागीदारी को लेकर उनका (श्री सतीशन) का क्या जवाब है। उन्होंने श्री सतीशन को चुनौती दी कि वह स्पष्ट करें कि आखिर ऐसा कौन सा सौदा हुआ था, जिसके लिए वह अपने परवूर निर्वाचन क्षेत्र के मनक्कापाडी स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
विपक्ष के नेता सतीशन को संबोधित करते हुए श्री विजयन ने पूछा, “विपक्ष के नेता को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किस ‘सौदे’ के चलते वह इस उद्घाटन समारोह में शामिल हुए और गोलवलकर की तस्वीर के सामने नतमस्तक हुए तथा औपचारिक दीप प्रज्वलित किया।”
वर्ष 2006 के गोलवलकर शताब्दी समारोह में अपनी भागीदारी को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा की गई आलोचना का जवाब देते हुए श्री सतीशन ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह बयान कि आरएसएस से लड़ाई केवल माकपा ने लड़ी है और इसमें कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं थी, केरल की जनता इसे पूरी तरह से खारिज कर देगी।
श्री सतीशन ने आज एक फेसबुक पोस्ट में कहा, “केरल की वह जनता, जो इतिहास से भली-भांति परिचित है, श्री विजयन के इस बयान को पूरी तरह से खारिज कर देगी कि आरएयएस से लड़ाई केवल माकपा ने लड़ी थी और इसमें कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं थी।”
मुख्यमंत्री को आरएसएस का एक पक्का एजेंट बताते हुए श्री सतीशन ने कहा , “श्री विजयन ही वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने केंद्रीय एजेंसियों की जांच से खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए एक शीर्ष पुलिस अधिकारी को दूत बनाकर आरएसएस नेताओं के पास भेजा था। वर्ष 1977 में आरएसएस के समर्थन से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले श्री विजयन ही थे। क्या उस समय उडुमा में आरएसएस नेता केजी मारार माकपा और आरएसएस के संयुक्त उम्मीदवार नहीं थे? यह मत भूलिए कि उसी केजी मारार की एक तस्वीर, जिसमें वे ईएमएस नम्बूदरीपाद को बैज लगा रहे हैं, आज भी मौजूद है।”
श्री सतीशन ने आगे कहा “क्या पिनाराई विजयन इस बात से इनकार करेंगे कि वरिष्ठ भाजपा नेता एलके आडवाणी ने पलक्कड़ से चुनाव लड़ने वाले माकपा उम्मीदवार शिवदासा मेनन के चुनावी अभियान में हिस्सा लिया था? अगर आप गूगल पर खोजेंगे, तो आपको 1989 में कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए विश्वनाथ प्रताप सिंह का समर्थन करते हुए माकपा नेताओं ईएमएस नम्बूदरीपाद , ज्योति बसु, श्री आडवाणी और श्री अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीरें मिल जाएंगी। श्री विजयन कहते हैं कि उन्होंने किसी भी चरण में आरएसएस से कभी कोई समझौता नहीं किया और इन सभी क्रांतिकारी परंपराओं को छिपाकर सांप्रदायिकता को अलग-थलग करने की कोशिश की है।”
उन्होंने कहा “संघ परिवार के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई को पिनाराई विजयन की ‘स्टडी क्लास’ की जरुरत नहीं है। ऐसा लगता है कि केरल में माकपा को भी इसकी जरुरत नहीं है। हमारे पास मुख्यमंत्री से भी ज्यादा तस्वीरें हैं।”
