कोलकाता | भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों पर ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया के दौरान गंभीर कदाचार, ड्यूटी में लापरवाही और अपनी कानूनी शक्तियों के गलत इस्तेमाल का आरोप है। निलंबित अधिकारियों में कृषि विभाग के सहायक निदेशक डॉ. सेफौर रहमान, राजस्व अधिकारी नीतीश दास और जॉइंट बीडीओ सत्यजीत दास समेत सात एईआरओ (AERO) शामिल हैं। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को इन सभी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।
चुनाव आयोग की यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्यक्रम बदला गया है। मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के नए बयान के अनुसार, दस्तावेजों की समीक्षा और दावों का निपटारा अब 21 फरवरी तक पूरा किया जाएगा। पोलिंग स्टेशनों के युक्तिकरण का काम 25 फरवरी तक चलेगा और स्वास्थ्य मानकों की जांच 27 फरवरी तक पूरी होगी। अंततः, फाइनल मतदाता सूची का प्रकाशन 28 फरवरी को किया जाएगा। कोर्ट ने माना कि अधिकारियों को दस्तावेजों की बारीकी से जांच के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता थी।
मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान राज्य में हुई हिंसा और चुनावी रिकॉर्ड जलाने की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यह विस्तार इसलिए भी जरूरी था ताकि चुनावी पंजीकरण अधिकारी बिना किसी दबाव के सही फैसले ले सकें। इस घटनाक्रम ने राज्य के प्रशासनिक और पुलिस अमले में खलबली मचा दी है।

