
सीधी। ओवरलोड रेत वाहनों से नष्ट हो रही सडक़ें हादसों का सबब बनी हैं। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जनकपुर से सीधी जिले में परिवहन करने वाले ओवरलोड रेत वाहनों से एमपीआरडीसी की अमझर-ददरी सडक़ के परखच्चे उड़ रहे हैं।
जिले के सुदूर सीमावर्ती जनकपुर से सीधी जिले की ओर रेत का परिवहन करने वाले वाहनों की संख्या सैकड़ों में है। रेत परिवहन में लगे वाहन पूरी तरह से ओवरलोड दौड़ते हैं लिहाजा रेत के ओवरलोड वाहन सडक़ों को समय से पहले ही क्षतिग्रस्त कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण और मुख्य सडक़ों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो रहे हैं। सडक़ का डामर उखड़ रहा है और सडक़ के धंसने जैसे समस्याएं हो रही हैं। ओवरलोड वाहनों के भारी वजन के कारण सडक़ें सकरी हो रही हैं और हादसे भी बढ़ रहे हैं। रेत के इस अवैध परिवहन से न केवल सडक़ों का बुनियादी ढांचा बर्बाद हो रहा है बल्कि धूल से वायु प्रदूषण और यातायात में व्यवधान भी उत्पन्न हो रहा है। एमपीआरडीसी के अधीन सडक़ के परखच्चे उडऩे से वाहनों की आवाजाही में भी समस्याएं कई स्थानों में देखी जा रही हैं।
हैरत की बात तो यह है कि रेत के ओवरलोड दौड़ रहे वाहनों पर कार्यवाई करने जिम्मेदारी जिन विभागों के पास है वह पूरी तरह से निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। सुदूर पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण एवं कार्यवाई करने से भी पूरी तरह से दूरी बनाये हुये हैं। यदि यही लापरवाही और मनमानी बनी रही तो कुछ महीने के अंदर ही यह मुख्य मार्ग पूरी तरह से खस्ताहाल हो जायेगा। गर्मी के बाद बरसात के दिनों में वाहनों की आवाजाही में उस दौरान और भी ज्यादा समस्याएं निर्मित हो जायेंगी, साथ ही सडक़ हादसे भी बढेंगे।
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वन अवरोधक नाके से बेखौफ निकलते हैं ओवरलोड वाहन
जनकपुर की ओर से ओवरलोड आने वाले रेत के वाहन वन अवरोध नाका नारायणपुर, मड़वास बफरजोन की ओर से निकलते हैं। हैरत की बात तो यह है कि यहां से निकलने वाले ओवरलोड रेेत के वाहनों की कोई जांच करने की जरूरत नहीं समझी जाती। यह वन अवरोध नाका संजय टाईगर रिजर्व सीधी की ओर से लगाया गया है। वन अवरोध नाका से रोजाना रेत परिवहन में लगे सैकड़ों ओवरलोड वाहन गुजरते हैं। यदि वन अवरोध नाका में जांच की कोई व्यवस्था बना दी जाय तो ओवरलोड वाहनों का चलना रूक सकता है।
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ऐसे होती है कार्रवाई से बचने की कोशिश
रेत के परिवहन में ओवरलोडिंग के बाद कार्रवाई से बचने की कोशिश भी की जाती है। दरअसल रेत खदान से रेत परिवहन की टीपी घनमीटर में जारी की जाती है। दूसरी ओर सडक़ पर आरटीओ और पुलिस द्वारा टन में ओवरलोड निकालकर नुकसान का आकलन किया जाता है। रेत से ओवरलोड वाहन पकड़े जाने के बाद क्षेत्रफल में पर्ची और वजन में जांच के बीच की इसी प्रक्रिया से बचकर निकलने की कोशिश की जाती है। इसका खामियाजा आमजन को सडक़ पर आवागमन के दौरान उठाना पड़ रहा है। इससे सडक़ें खराब हो रही हैं और सडक़ दुर्घटना के मामले भी बढ़ रहे हैं।
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ओवरलोडिंग से नुकसान और कार्यवाही के अधिनियम
सडक़ों का डैमेज: भारी ट्रकों और डम्परों के लगातार गुजरने से सडक़ें जल्दी धंस जाती हैं और टूट जाती हैं, जिससे भारी मरम्मत की जरूरत पड़ती है। दुर्घटनाओं में वृद्धि: ओवरलोड वाहनों के कारण सडक़ों पर रेत गिरने और डामर उखडऩे से दोपहिया वाहनों के फिसलने की संभावना बनी रहती है। ग्रामीण अंचल में संकरी ग्रामीण सडक़ों पर इन भारी वाहनों का दबाव ज्यादा होने से सडक़ें पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं। यदि कानूनी और सुरक्षित कार्रवाई की बात की जाये तो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 194 के तहत ओवरलोडिंग करने पर अब 20000 रुपये तक का भारी जुर्माना और प्रति अतिरिक्त टन 2000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते अवैध रेत खनन और ओवरलोडिंग पर कार्रवाई न होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है।
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इनका कहना है
जोगीपहरी से जनकपुर मार्ग कुछ महीने पहले ही एमपीआरडीसी के देख-रेख के लिए मिली है। ओवरलोड रेत वाहनों से सडक़ें खराब हो रही ओवरलोड वाहनों के परिवहन में रोक के लिए पत्राचार किया जायेगा।
संगीता उईके, एजीएम एमपीआरडीसी सीधी
छत्तीसगढ़ बार्डर के समीप जनकपुर से सीधी जिले की ओर आने वाले रेत के ओवरलोड वाहनों के संबंध में जानकारी नवभारत के माध्यम से संज्ञान में आई है। निश्चित ही इस पर कार्यवाई सुनिश्चित करायेंगे।
कपिलमुनि शुक्ला, खनिज अधिकारी सीधी
