वॉशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी दो सप्ताह के युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ाने को लेकर कड़े और अनिश्चित संकेत दिए हैं। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि 22 अप्रैल की समय सीमा तक कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य हमले शुरू कर सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही युद्धविराम की अवधि न बढ़ाई जाए, लेकिन ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकेबंदी (ब्लॉकेड) हर हाल में जारी रहेगी। राष्ट्रपति के इस रुख से पश्चिम एशिया में एक बार फिर पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका प्रबल हो गई है।
एक तरफ जहाँ युद्ध की धमकियां मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक रास्तों से समाधान निकालने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी सोमवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच बातचीत का एक नया दौर शुरू होने की उम्मीद है। रविवार तक दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुँच सकते हैं। यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 11-12 अप्रैल को हुई पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी। पाकिस्तान इस ऐतिहासिक मध्यस्थता के जरिए 1979 के बाद पहली बार दोनों देशों को आमने-सामने बिठाने में सफल रहा है।
मौजूदा युद्धविराम आगामी बुधवार को समाप्त हो रहा है, और ट्रंप के ताजा बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि कूटनीतिक बातचीत विफल रहती है और अमेरिका फिर से बमबारी शुरू करता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा। अमेरिकी प्रशासन ने अपना रुख साफ कर दिया है कि वह केवल एक ‘सख्त और स्थायी’ समझौते के पक्ष में है। दुनिया भर की नजरें अब इस्लामाबाद में होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि पश्चिम एशिया शांति की ओर बढ़ेगा या एक और विनाशकारी सैन्य संघर्ष की आग में झुलसेगा।

