रीवा: जिले में पड़ रही भीषण गर्मी से एक ओर जहा लोग बेहाल है वही दूसरी तरफ जल संकट गहराने लगा है. भूमिगत जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है जिसके चलते हैंडपम्प पानी के बजाय हवा उगलने लगे है. ग्रामीण क्षेत्रो के साथ शहरी क्षेत्र में भी जलसंकट गहराने लगा है.शहर के ऐसे कई मोहल्ले है जहा पेयजल सप्लाई नही है और लोग निजी पम्पो पर निर्भर है. खासकर शहर के अंतिम छोर में स्थित मोहल्लो में पानी की सबसे ज्यादा दिक्कत है.
जहा भी पम्प लगे है वहा पानी के लिये सुबह-शाम कतार लगती है. हैंडपम्प के मरम्मत न होने से बंद पड़े है, जबकि कलेक्टर ने सभी बंद पड़े हैडपम्पो की मरम्मत के निर्देश दिये है, साथ ही दल भी गठित किया गया है. लेकिन सब कुछ कागज में चल रहा है. शहर के अंदर जहा पेयजल सप्लाई है वहा तो पानी पहुंच रहा है लेकिन जिस मोहल्ले में पाइप लाइन नही है वहां के लोगो को गर्मी में दिक्कत हो रही है. ढ़ेकहा स्थित पद्मधर कालोनी के पास पानी की दिक्कत है. यहा मोहल्ले के लोग एक पम्प पर निर्भर रहते है जहा लम्बी कतार लगती है. इसी तरह ढ़ेकहा बीड़ा रोड़ के पास पानी की किल्लत है. इसी तरह पडऱा, कुठुलिया, चिरहुला कालोनी, घोघर आदि मोहल्लो में पानी की दिक्कत है. सुबह-शाम पानी के लिये लोग भटकते नजर आते है.
टैंकर से पानी की सप्लाई
नगर निगम पीएचई शाखा के अधिकारियों का कहना है कि जिन मोहल्लो में पाइप लाइन नही है वहा पानी की समस्या आ रही है. जल आपूर्ति के लिये टैंकर की व्यवस्था की गई है और टैंकर से पानी की सप्लाई की जा रही है. हालाकि शहरी क्षेत्र में ज्यादा पानी का संकट नही है. सुबह-शाम बराबर पेयजल सप्लाई हो रही है. जहा जरूरत है वहा टैंकर जा रहे है.
पहाड़ी क्षेत्र में सबसे ज्यादा परेशानी
ग्रामीण क्षेत्र में पानी की समस्या एक माह पहले से ही शुरू हो गई थी. लेकिन जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है पानी की दिक्कत भी बढ़ती जा रही है. नहरो में पानी बंद होने से भूमिगत जल स्तर और नीचे चला गया है, लिहाजा हैंडपम्प बंद होने लगे है. पहाड़ी क्षेत्र से लगे जो गांव है वहा पानी की ज्यादा दिक्कत है. गुढ़, बदवार, सीतापुर, गोविन्दगढ़ क्षेत्र के बांसा, मड़वा, टीकर, इसी तरह मऊगंज जिले के हनुमना एवं नईगढ़ी पहाड़ी क्षेत्र से लगे हुए जो गांव है वहा पानी की बेहद समस्या है. लोग एक किलो मीटर से साइकल से पानी लाने को विवश है. दरअसल जब गर्मी तेज होती है तो जलस्तर नीचे चला जाता है जिसके कारण हैंडपम्प काम करना बंद कर देते है. हालाकि अभी तालाब में पानी है जिसके कारण मवेशी एवं पशु-पक्षियों को दिक्कत नही हो रही है
