
महाकौशल की डायरी अविनाश दीक्षित। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में संगठन सृजन अभियान के जरिए नियुक्त किए गए 71 जिलाध्यक्षों के भविष्य का फैसला अगले सप्ताह होने जा रहा है। खबर है कि इस पूरी प्रक्रिया में जबलपुर के नगर अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा और ग्रामीण अध्यक्ष संजय यादव के कामकाज की भी स्क्रूटनी की जाएगी। जिसकी मुख्य वजह ये है कि पिछले कुछ समय से इन दोनों पदाधिकारियों के विरुद्ध स्थानीय स्तर पर लगातार असंतोष के स्वर उभर रहे थे और ये खबर भोपाल में बैठे कांग्रेस के आला नेताओं के खेमे तक जा पहुंची थी। हालांकि दोनों ही नेता अपनी सक्रियता का दावा कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के सामने अपनी सक्रियता उपयोगिता प्रमाणित करनी होगी। कुर्सी बचेगी कि जाएगी , के पेंच में फिलहाल कांग्रेस नगर अध्यक्ष और ग्रामीण नगर अध्यक्ष चिंतित नजर आ रहे हैं। खबर है कि दिल्ली से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि वामसी रेड्डी विशेष रूप से इस प्रक्रिया की मॉनिटरिंग के लिए भोपाल आ रहे हैं। प्रदेश संगठन की योजना के अनुसार जिलाध्यक्षों के कार्यों का पिछले 2 महीनों में 2 बार प्रारंभिक आंकलन किया जा चुका है। आगामी समीक्षा बैठक को अंतिम और निर्णायक माना जा रहा है, जिसमें कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रभारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। संगठन के गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि जिन जिलों में गुटबाजी चरम पर है या जहां से शिकायतों का पुलिंदा प्रदेश मुख्यालय पहुंचा है, वहां नेतृत्व परिवर्तन की सम्भावना ज्यादा है। वामसी रेड्डी की भोपाल में मौजूदगी यह स्पष्ट संकेत दे रही है कि केंद्रीय हाईकमान इस बार संगठन की मजबूती को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में नहीं है। अर्से से गुटबाजी में जबलपुर का नाम भी चर्चाओं में रहता आया है, ऐसे में सौरभ नाटी शर्मा और संजय यादव के माथे में भी चिंता की लकीरें अभी से नजर आने लगीं हैं। विदित हो कि कांग्रेस प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी 15 से 18 अप्रैल तक लगातार 4 दिनों तक संभागवार समीक्षा बैठकों का संचालन कर रहे हैं। पीसीसी मुख्यालय में होने वाली इन बैठकों में सभी जिलाध्यक्षों को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान संगठन निर्माण की प्रगति, क्षेत्रीय चुनौतियों और भविष्य की चुनावी रणनीति पर बिंदुवार चर्चा होगी। जबलपुर के परिप्रेक्ष्य में यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां का एक बड़ा असंतुष्ट खेमा पिछले काफी समय से सौरव शर्मा और संजय यादव के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। अब यह देखना होगा कि इन शिकायतों को कांग्रेस के शीर्ष नेता किस नजरिये से देखते हैं और दोनों को क्या निर्देश देते हैं। कानाफूसी है कि जबलपुर कांग्रेस के भीतर मची खींचतान के बीच यह समीक्षा सप्ताह पार्टी की अंदरूनी राजनीति में बड़े फेरबदल का आधार बन सकता है।
मोटी फीस वसूलने वाले निजी स्कूल निकले फिसड्डी….
मोटी फीस, सुविधाओं के नाम पर सिर्फ रस्मअदायगी, दिखावा करने वाले जबलपुर के प्रतिष्ठित कई सारे निजी स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा, पढ़ाई की कलई उस वक्त खुल गई जब शहर के सरकारी स्कूलों का कक्षा दसवीं, 12वीं का परीक्षा परिणाम निजी स्कूलों की तुलना में कहीं बेहतर सामने निकलकर आया। सवाल ये खड़े हुए कि क्या निजी स्कूलों द्वारा सिर्फ कमाई की जा रही है। वहीं जबलपुर के भी अभिभावकों को सामने आए परीक्षा परिणाम ने ये सोचने पर मजबूर किया कि क्यों न वे अपने अपने बच्चों को निजी स्कूलों से हटाकर सरकारी स्कूलों में पढ़ने एडमिशन कराएं। ये हाल आसपास के कुंडम, डिंडोरी, सिहोरा, बरगी सहित
महाकौशल के जनजातीय जिलों में भी सामने आया है जहां के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से बेहतर अंक हासिल किए हैं। यहां तक की प्रदेश की मैरिट सूची में जबलपुर के मॉडल हाई स्कूल की 12वीं की छात्रा श्रेया जैन ने 496 अंक और शासकीय सांदीपनी विष्णुदत्त हा.से.स्कूल सिहोरा की दसवीं की छात्रा ने भी 496 अंक हासिल कर मैरिट सूची में चौथा स्थान अर्जित किया है। घोषित परीक्षा परिणाम के अनुसार सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 76.8 फीसदी रहा तो वहीं निजी स्कूलों का रिजल्ट 68. 64 फीसदी रहा, जिसमें छात्राओं ने बाजी मारी। समझा जा सकता है कि नामी गिरामी निजी स्कूलों में अध्यापन का स्तर कितना अच्छा है।
आधी रात होते ही खुल जाते हैं शराब के एटीएम..
कहीं खुफिया होल तो कहीं खुफिया खिड़की तो कहीं कटी हुई शटर.. ये तीनों कलात्मक प्रयास इन दिनों जबलपुर के शहरी और ग्रामीण अंचलों में स्थित शराब दुकानों में देखे जा रहे हैं। इन जगहों में रात को उस वक्त शराब की बोतलें बढ़ी हुई कीमतों में बेची जातीं हैं जब निर्धारित समय पर शराब दुकान बंद हो जाती है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ये खुफिया होल, खिड़कियां शराब के एटीएम के जैसे काम कर रहे हैं। हाल ही में एक तस्वीर गढ़ा त्रिपुरी चौक स्थित शराब दुकान की सामने आई जहां संचालक ने बड़े ही शातिराना अंदाज में शराब दुकान के किनारे एक खुफिया होल करवाया और फिर शुरू हो गया कालाबाजारी का खेल। इस शराब दुकान में सवाल इसलिए ज्यादा खड़े हुए क्योंकि शराब दुकान से करीब बीस कदम की दूरी पर गढ़ा पुलिस थाना स्थित है और त्रिपुरी चौक में अधिकतर रात के वक्त पुलिस चैकिंग प्वाइंट भी लगाती है। ऐसे में सवाल ये लाजमी है कि पुलिस को ये खुफिया होल नहीं नजर आया। शराब दुकान में खुफिया होल की खबर जब जबलपुर एसपी तक पहुंची तो उन्होंने गढ़ा पुलिस थाना के स्टाफ को जमकर फटकार लगाई और तत्काल शराब दुकान का खुफिया होल बंद करवाया। तमाम सवाल उस वक्त खड़े हो गए जब खुफिया होल कराने वाले संचालक व शराब दुकान से मिलीभगत करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई, महज रस्मअदायगी के लिए फटकार लगा दी गई। उधर शराब दुकान संचालक का भी सीना चौड़ा होता दिखा। चर्चा है कि पुलिस से मिलीभगत के कारण ही दुकान में संचालक द्वारा खुफिया होल कराया गया और रात में अवैध तरीके से शराब का विक्रय करवाया गया। जानकारों ने तो सोशल मीडिया में तंज कसते हुए कहा कि फटकार लगाने से काम नहीं चलेगा कप्तान साहब, ऐसी गुस्ताखी करने वालों पर सख्त एक्शन लिया जाए। जिस प्रकार से इस गंभीर मुद्दे पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया गया उससे तो साफ था कि सब कुछ मिलीभगत का ही खेल था, जब पर्दा उठा तो फटकार पर आकर बात खत्म हो गई। फिलहाल मदिरा प्रेमी खुश हैं कि उन्हें जब चाहें तब शराब उपलब्ध हो जा रही है, हालांकि उनको थोड़ी मायूसी इस बात से भी है कि शराब दुकान खुले रहने के तय वक़्त के अंदर भी उनको दुकान संचालकों की ओवर प्राइजिंग की मनमानी सहना पड़ रही है।
