नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (वार्ता) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने लुप्तप्राय तिब्बती मृग चिरू के बालों से बने शाहतूश शॉल के अवैध निर्यात के आरोप में जयपुर स्थित मेसर्स इंडियन आर्ट गैलरी के मालिक सैयद शाहिद अहमद काशानी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत दोषी करार दिया है। दिल्ली के राउज़ एवेन्यू जिला न्यायालय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने हाल ही में काशानी के खिलाफ दिसंबर 2008 में दर्ज मामले में यह फैसला सुनाया है। उसे लुप्तप्राय तिब्बती मृग (पैंथोलोप्स हॉजसोनी) के बालों से बने शाहतूश शॉल के कारोबार के गंभीर आरोप में दोषी ठहराया गया है। स्थानीय रूप से चिरू के नाम से प्रसिद्ध यह तिब्बती मृग वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची में सूचीबद्ध है और कानूनी रूप से इसका व्यापार प्रतिबंधित है। पिछले 51 साल से शाहतूश शॉल के व्यापार पर वैश्विक स्तर पर प्रतिबंध है।
एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार इस मामले की अनूठी विशेषता वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ,केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), सीमा शुल्क और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्लूआईआई) के बीच लगभग 17 वर्षों तक चले निरंतर समन्वय का परिणाम बताया जा रहा है। डब्ल्यूसीसीबी को यहां इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर निर्यात खेप में 1,290 शाहतूश शॉल होने का पता चला और फरवरी 2009 में सीबीआई में शिकायत दर्ज की गई। यह पहली बार था जब वन्यजीव अपराध के मामले में सीबीआई के माध्यम से मुकदमा चलाया गया। इस तरह की पश्मीना शॉल के निर्यात के लिए वन्यजीव अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र आवश्यक है, इसलिए उत्तरी क्षेत्र के वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) की निरीक्षक आरती सिंह ने खेप की जांच की और शाहतूश फाइबर युक्त संदिग्ध शॉल की पहचान की। देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान की फोरेंसिक जांच में 41 शॉल में तिब्बती मृग के बाल पाए जाने की पुष्टि हुई।
पूछताछ में आरोपी ने कहा था कि उसने दिल्ली के एक विक्रेता से केवल मशीन से बना पश्मीना खरीदा था और वह किसी भी गलत काम में शामिल नहीं था। उसके वकीलों ने क्षेत्र परीक्षण, जांच और साक्ष्य प्रबंधन पर सवाल उठाए लेकिन अदालत ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए वन्यजीव सुरक्षा आयोग की रिपोर्टों को सही माना और आरोपी को तीन साल की साधारण कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने के साथ ही अन्य धाराओं में दो दो साल की अतिरिक्त सजा सुनाई । अदालत ने यह भी कहा किजब्त की गई शॉलें सरकारी संपत्ति बन गई हैं।

