
शाजापुर। शाजापुर जिले में किसानों की फसलों को चौपट होने से बचाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा जिले से काले हिरण और नील गाय पकडऩे के लिए साउथ अफ्रीका की बोमा पद्धति का उपयोग किया जा रहा है. इसके लिए बकायदा साउथ अफ्रीका से कंजर्वेशन सॉल्यूशंस की टीम जिले में रेस्क्यू के लिए पहुंचा हुआ है. बुधवार को साउथ अफ्रीका से आए दल एवं वन विभाग की टीम द्वारा जिले के पोलायकलां तहसील के लसूडिय़ा घाघ एवं निपनिया खुर्द में बोमा लगाया गया. जिसमें उमरीसिंघी, खड़ी, पोलायकला, मोरटा केवड़ी, तलेनी, जरखी, सकरई गांव से 153 कृष्णमृगों को किसानों के खेतों से पकडक़र राष्ट्रीय उद्यान के जंगल में छोड़ा जा रहा है. इस अभियान के तहत अभी तक 448 कृष्णमृगों को पकडक़र राष्ट्रीय उद्यानों में छोड़ा गया. वनमंडलाधिकारी देवास एवं अभियान प्रभारी वीरेन्द्र सिंह पटेल ने बताया कि इससे किसानों को होने वाले फसल नुकसान में कमी आएगी और कृषकों की समस्याओं का निदान होगा. इस तरह का देश में ये प्रथम अभियान है. उन्होंने बताया कि बुधवार को संभागायुक्त आशीष सिंह एवं कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना ने हेलीकॉप्टर और बोमा से कृष्णमृगों को पकडऩे के लिए चल रहे अभियान का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं को देखा और उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशंस के अधिकारियों एवं वन विभाग के अधिकारियों से चल रहे अभियान की कार्यवाही के बारे में पूछा. इसके साथ ही उन्होंने पकड़े गए वन्य प्राणियों को देश के अन्य अभ्यारण्यों में कैसे पहुंचाया जाता है, इसकी जानकारी भी ली. बुधवार को अभियान में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े, सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एचएस पाबला, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी एल कृष्णमूर्ति, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अजय यादव के द्वारा बोमा क्षेत्र में उपस्थित रहकर कृष्णमृगों को पकडऩे की कार्यवाही का निगरानी एवं अवलोकन किया गया.
