प्रदर्शनी के जरिए नई पीढ़ी ने जाना अंबेडकर का संघर्ष

छतरपुर:संविधान शिल्पी भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित ऑडिटोरियम में ‘समानता और संकल्प’ का अनूठा संगम देखने को मिला। जिला स्तरीय इस भव्य आयोजन में न केवल बाबा साहेब को याद किया गया, बल्कि उनके सामाजिक न्याय के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक विशेष प्रदर्शनी का भी अनावरण हुआ।
सत्ता और प्रशासन ने नवाया शीश
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि विधायक ललिता यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष विद्या अग्निहोत्री, और नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया द्वारा बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इस दौरान प्रशासन की ओर से कलेक्टर पार्थ जैयसवाल और जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अर्जरिया सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम की सबसे खास बात वह विशेष प्रदर्शनी रही, जिसमें बाबा साहेब के जीवन के कठिन संघर्षों, उनकी शिक्षा और संविधान निर्माण के सफर को चित्रों और तथ्यों के माध्यम से जीवंत किया गया था। युवाओं और विद्यार्थियों ने इस प्रदर्शनी में गहरी रुचि दिखाई।

“शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार”
मंच से बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि डॉ. अंबेडकर केवल एक वर्ग के नहीं, बल्कि पूरी मानवता के पथ-प्रदर्शक थे।
सामाजिक न्याय: समाज के अंतिम व्यक्ति तक अधिकार पहुँचाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
शिक्षा का महत्व: उनके ‘शिक्षित बनो’ के नारे को आज के डिजिटल युग में और अधिक प्रासंगिक बताया गया।
प्रेरणा की अपील
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने आमजन से अपील की कि बाबा साहेब के सिद्धांतों को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यक्तिगत जीवन में भी उतारें। बड़ी संख्या में उमड़ी नागरिकों की भीड़ ने इस आयोजन को एक जन-उत्सव का रूप दे दिया।

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