बोस्टन, 13 अप्रैल (वार्ता) अमेरिका के बोस्टन में एक संघीय ग्रैंड जूरी ने 10 भारतीय नागरिकों को सुविधा स्टोरों में फर्जी सशस्त्र डकैती के मामले में दोषी ठहराया है। इन डकैतियों का मकसद स्टोर क्लर्कों को आव्रजन आवेदनों में पीड़ित के रूप में फर्जी दावा करने की अनुमति दिलाना था। आरोपियों पर मार्च 2026 में आरोप लगाए गए थे। अभियोग पत्र में प्रत्येक प्रतिवादी पर वीजा धोखाधड़ी करने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है जिसके लिए अधिकतम पांच साल की जेल, तीन साल की निगरानी में रिहाई और 2,50,000 डॉलर का जुर्माना हो सकता है। मैसाचुसेट्स स्थित अटॉर्नी कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, सजा पूरी होने के बाद सभी को देश से निकाला जा सकता है।
दोषियों में 39 वर्षीय जीतेंद्र कुमार पटेल; महेश कुमार पटेल, 36 वर्ष; संजय कुमार पटेल, 45 वर्ष; दीपिकाबेन पटेल, 40 वर्ष; रमेशभाई पटेल, 52 वर्ष; अमिताभेन पटेल, 43 वर्ष; रौनक कुमार पटेल, 28 वर्ष; संगीताबेन पटेल, 36 वर्ष; मिनकेश पटेल, 42 वर्ष; और सोनल पटेल, 42 वर्ष शामिल हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इन सभी 10 लोगों पर पहले ही आपराधिक शिकायत के माध्यम से आरोप लगाए जा चुके हैं। इनमें से दो, रमेशभाई पटेल और रौनक कुमार पटेल, फिलहाल आव्रजन हिरासत में हैं और सजा सुनाए जाने के बाद इन सभी को देश से निकाला जा सकता है। जांच की शुरुआत रामभाई पटेल से हुई जो इस योजना के कथित आयोजक थे और गेटवे चालक बलविंदर सिंह, को मई 2025 में दोषी ठहराया गया। अभियोग पत्र के अनुसार, मार्च 2023 में, रामभाई पटेल और उनके सह साजिशकर्ताओं ने मैसाचुसेट्स और अन्य राज्यों में छह या अधिक सुविधा स्टोर, शराब की दुकानों और फास्ट-फूड आउटलेट्स में सशस्त्र डकैती की घटनाओं को अंजाम दिया।
इन डकैतियों का मकसद क्लर्कों या मालिकों को यू वीजा के लिए आवेदन करने का बहाना देना था जो कुछ खास अपराधों के पीड़ितों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता करने पर दिया जाता है। यू वीजा को अमेरिकी कांग्रेस द्वारा अक्टूबर 2000 में मानव तस्करी एवं हिंसा पीड़ितों की सुरक्षा अधिनियम के तहत पेश किया गया था, ताकि गंभीर अपराधों के पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान की जा सके जो जांच या अभियोजन में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता करते हैं। यू वीज़ा का पात्र होने के लिए, आवेदकों को निर्दिष्ट आपराधिक गतिविधियों का शिकार होना चाहिए, शारीरिक या मानसिक क्षति का शिकार होना चाहिए, अपराध के संबंध में जानकारी प्रदान करनी चाहिए और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करना चाहिए। इसके अलावा, आवेदकों को अमेरिकी आव्रजन कानून के तहत निर्धारित प्रवेश योग्यता आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए। इन फर्जी लूटपाट की घटनाओं के दौरान, कथित तौर पर “लुटेरे” ने दुकान के कर्मचारियों को नकली बंदूक दिखाकर धमकाया और नकदी चुरा ली। यह पूरी घटना दुकान के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। पीड़ितों ने अपराध की सूचना पुलिस को देने से पहले कुछ मिनट इंतजार किया।
अभियोग पत्र में दावा किया गया है कि आरोपियों ने रामभाई पटेल को डकैतियों का नाटक रचने के लिए पैसे दिए या परिवार के सदस्यों को “पीड़ित” के रूप में शामिल होने की व्यवस्था की। इस मामले की घोषणा अमेरिकी अटॉर्नी लीह बी. फोली और एफबीआई बोस्टन के विशेष प्रभारी एजेंट टेड ई. डॉक्स ने की। इस जांच में कई अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय, एफबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा, आईईसी प्रवर्तन और निष्कासन अभियान, मैसाचुसेट्स राज्य पुलिस और कई राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां शामिल थीं।

