उच्चतम न्यायालय ने लालू प्रसाद को ‘जमीन के बदले नौकरी मामले’ में निचली अदालत के सामने पेश होने से छूट दी

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद को ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले की कार्यवाही के दौरान निचली अदालत में पेश होने से छूट दे दी है।

न्यायालय श्री प्रसाद की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मामले को चुनौती दी गई है। इसमें सक्षम प्राधिकारी से अनिवार्य पूर्व मंजूरी के बिना कथित तौर पर नई पूछताछ और जांच शुरू करने के कदम को भी चुनौती दी गई है।

इससे पहले 24 मार्च को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में सीबीआई की प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने श्री यादव के उस तर्क को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व मंजूरी के अभाव में यह कार्यवाही कानूनी रूप से उचित नहीं है।

यह मामला 2004 से 2009 के बीच श्री प्रसाद के रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में की गई कथित ‘ग्रुप डी’ नियुक्तियों से संबंधित है।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि उम्मीदवारों को उन जमीन के टुकड़ों के बदले नियुक्त किया गया था जो लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर उपहार में दिए गए थे या स्थानांतरित किए गए थे।

 

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