
जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कर्मचारियों को उच्च वेतनमान देने के मामले में पूर्व आदेश पालन नहीं करने पर किये जाने को हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने गंभीरता से लिया है। आदेश का परिपालन नहीं किये जाने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि अवमानना के आरोप तय करने के पहले मुख्य सचिव स्पस्टीकरण का अवसर दिया जाना चाहिये। एकलपीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव को तलब करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई को निर्धारित की है।
हाईकोर्ट के आदेश के आदेश के बावजूद भी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कर्मचारियों को उच्च वेतन का लाभ नहीं दिये जाने के कारण उक्त याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि उक्त अवमानना याचिका 2018 से लंबित है। अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान पारित आदेश के बावजूद भी अभी तक सरकार ने अप्रैल 2017 में दिए आदेश का पालन नहीं किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि हाईकोर्ट कर्मियों को राज्य सरकार के कर्मचारियों से अलग वेतनमान दिया जाए। आदेश का पूर्ण पालन करने के लिए महाधिवक्ता और मुख्य सचिव ने कई बार समय लिया। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट के कर्मचारी किशन पिल्लई व अन्य ने वर्ष 2016 में दायर याचिका में उच्च वेतनमान का लाभ नही दिए जाने को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने 28 अप्रैल, 2017 को अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार के पास यह मामला 27 जून, 2015 से लंबित है, इसलिए हाई कोर्ट के कर्मचारियों के वेतनमान से जुड़े इस मुद्दे का चार सप्ताह में निराकृत किया जाए। इस आदेश का पालन न होने पर यह अवमानना याचिका वर्ष 2018 में दायर की गई। 16 जनवरी 2025 को सरकार की ओर से समय की राहत चाहते हुए कहा गया था कि पूरी प्रकिया के बाद मामला कैबिनेट से होते हुए राज्यपाल तक पहुंचा है।
