बीजिंग, 10 अप्रैल (वार्ता) चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को ताइवान की कुओमिन्तांग पार्टी की अध्यक्ष चेंग ली-वुन से मुलाकात की। पिछले 10 वर्षों में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) और कुओमिन्तांग नेताओं के बीच पहली मुलाकात है। भारत में चीन के राजदूत शू फीहोंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि कि श्री जिनपिंग ने इस बैठक को ‘बेहद महत्वपूर्ण’ बताया और इस बात पर जोर दिया कि “ताइवान जलडमरूमध्य की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य चाहे जैसा भी हो जलडमरूमध्य के दोनों ओर के चीनियों के एक साथ आने की मौजूदा गति नहीं बदलेगी।” श्री जिनपिंग ने कहा कि जलडमरूमध्य के दोनों ओर के लोग शांति और बेहतर जीवन की आकांक्षा रखते हैं, यह एक ऐसी जिम्मेदारी है जिससे सीपीसी और कुओमिन्तांग ‘पीछे नहीं हट सकते’ और यह दोनों पार्टियों के लिए मिलकर काम करने की एक प्रेरक शक्ति है।
सीपीसी केंद्रीय समिति और श्री जिनपिंग द्वारा आमंत्रित सुश्री चेंग पिछले एक दशक में चीनी मुख्य भूमि पर प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाली कुओमिन्तांग की पहली नेता हैं। बीजिंग से प्रतिनिधिमंडल ने जियांग्सू प्रांत और शंघाई का दौरा किया। दौरे पर बोलते हुए सुश्री चेंग ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने ‘उल्लेखनीय प्रगति और विकास देखा है, जो हमारी अपेक्षाओं और कल्पनाओं से कहीं परे है।’ उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को ‘जलडमरूमध्य में सुलह और एकता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।’ रिपोर्ट्स के अनुसार बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में बैठक के दौरान श्री ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य ‘हमारे साझा वतन की शांति और स्थिरता की रक्षा करना और जलडमरूमध्य के आर-पार संबंधों के शांतिपूर्ण विकास को बढ़ावा देना है।” यह यात्रा ताइवान जलडमरूमध्य में लंबे समय से जारी तनाव के बीच हुई है, जहां बीजिंग ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताता है और बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं करता है।

